बीएसएल में कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन, ब्लैक बैज से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक का एलान

बोकारो इस्पात संयंत्र के 7200 कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। ब्लैक बैज से लेकर भूख हड़ताल तक की रणनीति तैयार की गई है।

बोकारो. बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ-बीएकेएस की कार्यकारिणी की बैठक में कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सेल कॉर्पोरेट और बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गयी. आंदोलन की शुरुआत ब्लैक बैज लगाने से होगी और मांगें पूरी नहीं होने पर मामला अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक ले जाने का निर्णय लिया गया है.

चार चरणों में होगा आंदोलन

यूनियन के अनुसार, आंदोलन के पहले चरण में बोकारो इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन और प्रबंधन के विरोध में ब्लैक बैज लगायेंगे. दूसरे चरण में बीएसएल के प्रत्येक विभागाध्यक्ष कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया जायेगा.

तीसरे चरण में कर्मचारियों द्वारा मौन जुलूस और पदयात्रा निकाली जायेगी. इसके बाद चौथे चरण में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गयी है.

7200 गैर-कार्यपालक कर्मचारियों की समस्याएं लंबित : यूनियन

बीएकेएस का दावा है कि बोकारो इस्पात संयंत्र में करीब 7200 गैर-कार्यपालक कर्मचारी कार्यरत हैं और उनकी कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं. यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों से जुड़े आर्थिक और सेवा संबंधी कई मुद्दों का अब तक समाधान नहीं किया गया है.

यूनियन के अनुसार, सेल कॉर्पोरेट कार्यालय, लोधी रोड, नई दिल्ली से जुड़े गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के 45 से अधिक मुद्दे लंबित हैं. वहीं बोकारो इस्पात संयंत्र और इसके विभिन्न विभागों से जुड़े 20 से अधिक मामलों का भी वर्षों से समाधान नहीं हुआ है.

प्रबंधन पर संवाद नहीं करने का आरोप

बीएकेएस ने आरोप लगाया कि सेल कॉर्पोरेट कार्यालय और बीएसएल प्रबंधन की ओर से औद्योगिक संबंधों को लेकर अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है. यूनियन का कहना है कि मानव संसाधन के वरीय अधिकारियों और प्रबंधन को कई मांग पत्र और शिकायतें देने के बावजूद न तो मामलों का समाधान किया जा रहा है और न ही मांग पत्रों का उचित जवाब मिल रहा है.

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यूनियन ने एकतरफा स्थानांतरण, निलंबन, इंक्रीमेंट में कटौती और शो-कॉज नोटिस जैसी कार्रवाई को भी कर्मचारियों पर दबाव बनाने वाला कदम बताया है. साथ ही इस्पात मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, सीएलसी, डीएलसी और लोक उद्यम विभाग से शिकायतों के समाधान की मांग किये जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है.

संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा : महासचिव

बीएकेएस के महासचिव हरिओम ने कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन के रूप में यूनियन के पास अब शोषण के खिलाफ संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि विभिन्न मंचों पर कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलने के बाद यूनियन ने आंदोलन का रास्ता चुना है.

वहीं यूनियन के उपाध्यक्ष कृष्ण रजवार ने उच्च प्रबंधन पर कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि सैकड़ों मुद्दे लंबित हैं, लेकिन उनका समाधान नहीं किया जा रहा है.

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By C p singh

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