बोकारो : मौसम के बदलने पर डायरिया का प्रभाव अधिक होता है. ऐसी स्थिति में डायरिया का कारण जानना जरूरी है ताकि मौसम के बदलने पर भी डायरिया से बचा जा सके. डायरिया से सर्वाधिक प्रभावित बच्चे व बुजुर्ग होते हैं. समय पर काबू नहीं पाया जाये तो प्रभावित व्यक्ति की जान तक जा सकती है.
यह बातें अनुमंडल अस्पताल चास के उपाधीक्षक डॉ एके चौधरी ने ‘प्रभात खबर’ से अस्पताल कार्यालय में कही. डॉ चौधरी ने कहा : डायरिया होने पर ज्यादातर मरीज खुद ही इलाज करने लगते हैं. ऐसी स्थिति में मरीज की कंडिशन खराब होने लगती है. डायरिया होने की स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल जाने की जरूरत है ताकि समय पर उपचार हो सके.
डायरिया फैलने के कारण
- एकाएक मौसम में परिवर्तन होना
- दूषित फल व पानी का सेवन
- अधिक ठंडा पानी व बर्फ का प्रयोग
- फूड प्वाइजनिंग से भी दस्त
- गर्मियों में तेज मिर्च-मसाले वाला भोजन
- वायरल इंफेक्शन से सबसे ज्यादा
- पेट में बैक्टीरिया के संक्रमण
- दवा की एलर्जी, साइड इफेक्ट्स या रिएक्शन
- बासी दूध, पनीर या मीट खाना
डायरिया के लक्षण
- पेट में मीठा दर्द होना
- पानी के समान मल निकलना
- शारीरिक दुर्बलता
- पेट दबाने पर पीड़ा होना
- जीभ सूखना
- हाथ-पैर ठंडे पड़ना
- शरीर में बेचैनी व थकान
डायरिया से बचने के उपाय
- बासी, तली, भारी, मिर्च-मसालेदार खाना से परहेज
- गर्मी में शराब, चाय, कॉफी का प्रयोग कम करें
- बासी, खट्टी व महक वाला दूध का प्रयोग से परहेज
- बाजार में बिना ढकी चीजों को न खाएं
- फ्रीज में रखे पदार्थ बाहर निकाल कर तुरंत न खाएं
- डायरिया होने पर खाना-पीना
- ओआरएस घोल का प्रयोग लगातार करें
- भोजन में दही-चावल या खिचड़ी
- साबूदाना की खीर, छाछ या दही इच्छानुसार
- नीबू, मौसमी, संतरे, अनार का जूस का सेवन
