बोकारो : हर बीतता दिन भीषण गरमी के दिन को नजदीक लेकर आ रहा है. अभी ही मौसम ऐसा हो गया है कि जेठ का अनुभव हो रहा है. सूर्य की तपिश निकलने से पहले ही पसीना को उड़ा दे रहा है. पारा नया कीर्तिमान बना रहा है. मंगलवार को पारा 42 डिग्री पहुंच गया.
चुभती गरमी का अहसास अहले सुबह सूर्य दर्शन के साथ ही होने लगा था. 09:30 बजते-बजते गरमी चरम स्थिति को दर्शाने लगा था. दोपहर को सूर्य तल्ख प्रवृत्ति के साथ आसमान पर कब्जा जमाये हुए था. किरण शरीर पर वार की तरह प्रतीत हो रहा था. लोग इससे बचने का भरसक प्रयास करते नजर आये. कोई छाता के सहारे, तो गमछा से चेहरा को ढंकने की कोशिश करते नजर आये. सबसे ज्यादा परेशानी राहगीर व बाइक से सफर करने वालों को हुई. गरम हवा की थपेड़ मानो लोगों की अग्नि परीक्षा ही ले रहा था. असर खाली सड़क के रूप में स्पष्ट देखा जा सकता था.
तरावट के लिए जूस, पानी, लस्सी : गरमी व प्यास का अपना रिश्ता है. सूर्य की चाल गला को सुखाने में महारथ रखता है. काम के कारण लोगों को नहीं चाहते हुए भी लोगों को घर से बाहर निकलना ही पड़ता है, ऐसे में प्यास लगना लाजिमी है. प्यास नहीं तराश. तराश बुझाने के लिए सिर्फ पानी कहां आराम देने वाला था. लोगों ने तरावट मिटाने के लिए गन्ने का जूस, बेल का शरबत, जलजीरा-आम पना की दुकानों की ओर रुख किया. वहीं शीतल पेय का डिमांड भी पारा के हिसाब से चढ़ता रहा.
ढक्कन उठाकर फ्रीज का मजा : गरमी के मौसम में ठंडा पानी की अहमियत अद्वितीय है. बोकारो जैसे शहर में लगभग हर घर में फ्रीज की सुविधा है. जिसके घर फ्रीज नहीं है, वह खरीदने की तैयारी में भी है. लेकिन, फ्रीज का पानी हर किसी को रूचता नहीं है. इस कारण लोग देशी फ्रीज यानी घड़ा व सुराही का इस्तेमाल करते हैं. मौसम को देखते हुए शहर में दर्जनों अस्थायी घड़ा व सुराही का दुकान सज गया है. साइज के अनुसार घड़ा व सुराही की कीमत 50 से 100 रुपया के बीच है. लोग जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं.
