बोकारो : बाल मृत्यु दर को कम करने में रोटा वायरस काफी मददगार साबित होगा. नियमित प्रतिरक्षण कार्यक्रम में शनिवार से रोटा वायरस वैक्सीन शामिल हो जायेगा. बोकारो में यह डेढ़, ढाई व साढे तीन माह के शिशुओं को दी जायेगी. स्वास्थ्य कर्मियों को रोटा वायरस वैक्सीन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है. वैक्सीन जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होगा. टीका देने के बाद बच्चों को उल्टी, खांसी व हल्का बुखार आ सकता है. यह बातें शुक्रवार को कैंप दो स्थित सीएस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सीएस डॉ एस मुर्मू ने कही. वर्तमान समय में रोटा वायरस का उपचार 14 दिनों तक ओआरएस व जिंक की गोली देकर की जाती है.
आज से सरकारी अस्पतालों में मिलेगा रोटा वायरस का टीका : सिविल सर्जन
बोकारो : बाल मृत्यु दर को कम करने में रोटा वायरस काफी मददगार साबित होगा. नियमित प्रतिरक्षण कार्यक्रम में शनिवार से रोटा वायरस वैक्सीन शामिल हो जायेगा. बोकारो में यह डेढ़, ढाई व साढे तीन माह के शिशुओं को दी जायेगी. स्वास्थ्य कर्मियों को रोटा वायरस वैक्सीन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है. वैक्सीन जिले […]

सुरक्षित है टीका : डॉ मुर्मू ने कहा कि रोटा वायरस से बचाव में ‘संक्रमण से स्वच्छता’ ही एकमात्र विकल्प है. समाज को साफ-सफाई को प्राथमिकता देनी होगी. राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नौ जानलेवा बीमारी गाल घोटू, काली खांसी, टेटनस, पोलियो, यक्ष्मा, खसरा, हेपेटाइटिस बी, न्यूमोनिया व मेनिंजाइटिस के विरुद्ध टीका दिया जाता है.
रोटा वायरस टीका एक सुरक्षित टीका है. मौके पर सदर डीएस सह शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अर्जुन प्रसाद, डीटीओ डॉ बीपी गुप्ता, डीएमओ एके पोद्दार, आरसीएच डॉ एस टुडू, डीपीएम रवि शंकर, डीडीएम कुमारी कंचन, डीएएम अमित कुमार, डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस ऑफिसर ए रज्जाक, यूनिसेफ के रीजनल समन्वयक नंदजी दूबे मौजूद थे.
वैक्सीन से खतरा कम
डॉ मुर्मू ने कहा कि संक्रमित सामग्री छूने पर रोटा वायरस अन्य व्यक्ति में फैल सकता है. रोटा वायरस का वैक्सीन (टीका) लेने से संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है. रोटा वायरस तीन माह से 35 माह के बीच के शिशुओं में सर्वाधिक होता है. वृद्धों की रोग प्रतिरोधकता घटने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. नवजात शिशुओं की देखभाल करने वालों में भी रोटा वायरस की आशंका अधिक होती है. ऐसी स्थिति में सफाई व सावधानी जरूरी है. संक्रमित व्यक्ति के लिए जरूरी है कि सावधानी के साथ लोगों के संपर्क में रहें.
रोटा वायरस संक्रामक वायरस है जो पी़ड़ित व्यक्ति में गैस्ट्रोएंट्राइटिस की समस्या उत्पन्न करता है. संक्रमण के कारण उल्टी, दस्त, शरीर के निचले हिस्से में दर्द, भूख में कमी, कमजोरी के साथ चक्कर आना व मांसपेशियों में अकड़न जैसी समस्याएं होती हैं. डायरिया व वोमिटिंग के कारण व्यक्ति में डिहाड्रेशन हो सकता है. डिहाड्रेशन बढ़ने पर पीड़ित की मौत हो सकती है.
रोटा वायरस के शिकार अधिकतर नवजात शिशु व पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं. वयस्क में भी हो सकता है. रोटा वायरस का वैक्सीन शिशुओं के लिए लाभदायक सिद्ध होगा. यह बातें ‘प्रभात खबर’ से बातचीत करते हुए सिविल सर्जन डॉ एस मुर्मू ने कही. कहा कि वयस्कों में संक्रमण कम गंभीर होता है. रोटा वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल में संक्रमण के लक्षण महसूस होने के कई दिन पहले से मौजूद होता है. लक्षण खत्म होने के 10 दिन बाद तक रह सकता है. यह वायरस हाथ से मुंह में पहुंचकर संक्रमण कर सकता है. संक्रमित व्यक्ति में वायरस से ग्रस्त होने के कोई लक्षण न दिखने पर भी रोटा वायरस का खतरा हो सकता है.
बच्चे की शौच में मदद करने के बाद भी हाथों की सफाई जरूरी है. रोटा वायरस से पीड़ित व्यक्ति खिलौने, बरतन, भोजन आदि को स्पर्श करता है तो वायरस काफी समय के लिए रह सकता है.