सीपी सिंह
बोकारो : शुरुआती गर्मी का असर नदियाें, तालाब पर होने लगा है. तालाब सिकुड़ने पर मजबूर हैं, तो नदियों के दोनों तट एक दूसरे के करीब आने लगे हैं. जोरिया की बात ही क्या करनी! गर्मी आते ही जेहन में प्यास जागती है. फिर प्यास बुझाने के तरीकों को लेकर सरकारी घोषणा होने लगती है. साल-दर-साल की यही कहानी है.
बोकारो पठारी हिस्सा है. इस कारण नदियां जल्दी सूखने लगती है. गर्मी आगमन का शुरुआती असर नदियों पर दिखने लगा है. दामोदर व गरगा यहां की प्रमुख नदियां हैं. जहां दामोदर के जलस्तर में पिछले एक सप्ताह में लगभग 03 मानक इकाई की गिरावट आयी है, वहीं गरगा नदी का जलस्तर बहुत तेजी से गिर रहा है. जनता की प्यास बुझाने के लिए सरकार हर साल दर्जनों चापाकल हर प्रखंड में लगाती है.
भूमिगत जलस्तर बनाये रखे में नदी व जोरिया अपनी भूमिका निभाती हैं. जब नदी ही सूख रही है, तो भूमिगत जलस्तर में गिरावट होना भी लाजिमी है. ऐसे में सवाल जब नदी ही सूख रही है, तो चापाकल में पानी कहां से आयेगा! तेनुघाट डैम में 852 मानक इकाई का जलस्तर मेनटेन किया जाता है. बावजूद इसके सोमवार को डैम में जलस्तर 849.85 मानक इकाई दर्ज किया गया. जबकि, अंतिम बार डैम से पानी दिसंबर के शुरुआत में ही छोड़ा गया था. इसका असर दामोदर के तटीय इलाका में देखने को मिल रहा है. दामोदर नदी हर दिन औसतन एक फुट तटबंध से दूर हो रही है. तेनुघाट डैम के जलस्तर में हर दिन 0.5 फुट गिरावट दर्ज की जा रही है. वहीं गरगा नदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है.
डीप बोरिंग के साथ नहीं बन रहा है सोख्ता : चास नगर निगम क्षेत्र में 25 हजार घर हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 3000 से कम घर में ही सोख्ता का निर्माण किया गया है.
बोकारो विधायक मद से पिछले तीन वर्ष में 100 से अधिक डीप बोरिंग का निर्माण किया गया है. डीप बोरिंग लगाये जा रहे हैं, लेकिन साथ में सोख्ता का निर्माण नहीं हो रहा है. मतलब, पानी का इस्तेमाल व बर्बाद हो रहा है. संचयन के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है. हालांकि विधायक मद से बनने वाली 400 से अधिक चापाकल में सोख्ता बनाया गया है.
