रांची में खुलेंगे छह उत्प्रेरण केंद्र

रांची: भारत सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत बाल श्रमिकों को स्कूल से जोड़ने के लिए रांची में शैक्षणिक सत्र 2014-15 के लिए छह उत्प्रेरण केंद्र चलाने की अनुमति दी है. इसके लिए राशि आवंटन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. जुलाई के प्रथम सप्ताह से उत्प्रेरण केंद्र काम करने लगेंगे. केंद्र […]

रांची: भारत सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत बाल श्रमिकों को स्कूल से जोड़ने के लिए रांची में शैक्षणिक सत्र 2014-15 के लिए छह उत्प्रेरण केंद्र चलाने की अनुमति दी है. इसके लिए राशि आवंटन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

जुलाई के प्रथम सप्ताह से उत्प्रेरण केंद्र काम करने लगेंगे. केंद्र का संचालन सुबह सात से शाम सात बजे तक होगा. बच्चे यहां जब चाहे आ सकते हैं. बच्चे काम के साथ-साथ पढ़ाई भी करते हैं. केंद्र में बच्चों को नाश्ता, खाना व पाठय़ सामग्री दी जाती है.

रांची में पहले से पांच उत्प्रेरण केंद्र संचालित हैं. मध्य विद्यालय कांटाटोली, मध्य विद्यालय हिंदी हिंदपीढ़ी, मध्य विद्यालय बीएमपी डोरंडा, मध्य विद्यालय जगन्नाथपुर व मध्य विद्यालय हटिया में केंद्र का संचालन किया जा रहा है. जिस क्षेत्र में बाल श्रमिकों को स्कूल से जोड़ने का कार्य पूरा हो गया है, वहां इसे बंद कर नये क्षेत्रों में इसे खोला जा सकता है.

बच्चों के शैक्षणिक स्तर ठीक होने के बाद उम्र के अनुरूप उन्हें स्कूल से जोड़ दिया जाता है. बच्चों का नामांकन स्कूल में हो जाने के बाद उनकी पढ़ाई सामान्य बच्चों की तरह शुरू हो जाती है.

वर्ष 2010 में शुरुआत

इस योजना की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी. इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों को स्कूल से जोड़ना है जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते हैं. इसमें बच्चों को अपने काम के साथ पढ़ाई करने की भी सुविधा दी जाती है. रांची में पहले से चल रह केंद्र में काफी संख्या में बाल श्रमिकों को इससे जोड़ा गया है.

टीवी की व्यवस्था

केंद्र में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन की भी व्यवस्था होती है. केंद्र में टीवी व कंप्यूटर की व्यवस्था की जाती है. बच्चों के स्तर को देखते हुए उन्हें अलग-अलग ग्रुप में बांटा जाता है. प्रत्येक बच्चे का प्रोफाइल तैयार किया जाता है. केंद्र में बच्चे को कम से कम दो घंटा रखने का लक्ष्य रखा गया है.

बच्चों का होता है सर्वे

केंद्र शुरू करने के पूर्व क्षेत्र में बाल श्रमिकों की संख्या का सर्वे किया जाता है. सर्वे में चयनित किये गये बच्चों के अभिभावकों से बात कर बच्चे को केंद्र में भेजने के लिए प्रेरित किया जाता है. अभिभावक की सहमति के बाद प्रारंभ में केंद्र संचालक स्वयं बच्चे को लाने घर जाते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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