चियांकी हवाई अड्डा शुरू होने से पलामू में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, लोगों की कमाई में होगा इजाफा

Chianki Airport: मेदिनीनगर का चियांकी हवाई अड्डा चालू होने से पलामू प्रमंडल में कनेक्टिविटी सुधरेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. सांसद विष्णु दयाल राम की पहल के बावजूद राज्य सरकार की मंजूरी लंबित है, जिससे उड़ान योजना के तहत परियोजना अटकी हुई है और विकास की उम्मीदें टिकी हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Chianki Airport: पलामू जिले के मेदिनीनगर स्थित चियांकी हवाई अड्डा लंबे समय से चालू होने की प्रतीक्षा में है. यदि यह हवाई अड्डा शुरू होता है, तो न सिर्फ क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. जिले के लोगों की कमाई में बढ़ोतरी होगी. फिलहाल यह हवाई अड्डा विमान परिचालन के लिए सक्रिय नहीं है, जिससे पलामू प्रमंडल के विकास की गति प्रभावित हो रही है.

सांसद की पहल, लोकसभा में उठी मांग

पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम लगातार इस हवाई अड्डे को चालू कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए चियांकी हवाई अड्डे को ‘उड़ान’ योजना के तहत शुरू करने की मांग की. इससे पहले भी उन्होंने कई बार केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है.

केंद्र ने राज्य सरकार पर डाली जिम्मेदारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, हवाई अड्डे के चालू नहीं होने का मुख्य कारण राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रस्ताव और प्रमाणन का अभाव है. केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार की ओर से अभी तक भूमि, सुरक्षा, अग्निशमन सेवा और मौसम संबंधी सुविधाओं को लेकर आवश्यक पुष्टि नहीं भेजी गई है. इसी कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.

‘उड़ान’ योजना का क्या है प्रावधान

‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत देश के छोटे और कम विकसित हवाई अड्डों को जोड़ने का प्रयास किया जाता है. यह एक मांग-आधारित योजना है, जिसमें एयरलाइंस कंपनियां संभावित यात्रियों की संख्या और लाभ के आधार पर रूट के लिए बोली लगाती हैं. जिन हवाई अड्डों को विकसित करने की जरूरत होती है, उन्हें इस योजना के तहत उन्नत किया जाता है.

2022 में मिला था मौका, 2023 में रद्द हुआ मार्ग

चियांकी हवाई अड्डे को 14 दिसंबर 2022 को रांची और पटना से जोड़ने के लिए एयर टैक्सी सेवा का प्रस्ताव मिला था. इसे ‘उड़ान’ योजना 4.2 के तहत चयनित किया गया था. लेकिन समय पर हवाई अड्डे का विकास और आवश्यक सुविधाएं पूरी नहीं होने के कारण 28 दिसंबर 2023 को यह मार्ग रद्द कर दिया गया. यह पलामू के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ.

एयरलाइंस की रुचि भी हुई कम

मार्ग रद्द होने के बाद अब तक किसी भी एयरलाइन कंपनी ने यहां से उड़ान संचालन के लिए नया प्रस्ताव नहीं दिया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि जब तक बुनियादी ढांचा तैयार नहीं होगा, तब तक निजी कंपनियां निवेश करने से बचेंगी.

राज्य सरकार की अहम भूमिका

आरसीएस-उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डे के विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकार की होती है. इसमें यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन सेवा, मौसम संबंधी सुविधाएं और संचालन प्रबंधन शामिल हैं. हालांकि इन कार्यों पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है.

लंबित है जरूरी मंजूरी और प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार से कई जरूरी बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जिसमें भूमि की उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तकनीकी सुविधाएं शामिल हैं. लेकिन अभी तक इन पर कोई अंतिम पुष्टि नहीं मिली है. यही कारण है कि परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है.

हवाई अड्डा चालू होने से संभावित फायदे

यदि चियांकी हवाई अड्डा शुरू होता है, तो पलामू प्रमंडल के लोगों को सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. मेडिकल और इमरजेंसी सेवाओं में भी तेजी आएगी.

पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

पलामू क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है. हवाई अड्डा चालू होने से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है. साथ ही उद्योगों को भी लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी.

सांसद का भरोसा, जल्द मिलेगी सफलता

सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा कि वे लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और राज्य सरकार से भी समन्वय बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि यदि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी हो जाएं, तो जल्द ही चियांकी हवाई अड्डे से उड़ान सेवा शुरू हो सकती है.

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विकास की राह में प्रशासनिक तालमेल जरूरी

इस पूरे मामले से यह साफ है कि चियांकी हवाई अड्डे का भविष्य केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय पर निर्भर करता है. यदि समय पर जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया जाए, तो पलामू को एक बड़ा विकासात्मक तोहफा मिल सकता है. अभी सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि यह परियोजना कब जमीन पर उतरती है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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