स्थानीयता का मुद्दा बनेगा एजेंडा

रांची: सरकार द्वारा गठित कमेटी ने स्थानीय नीति का प्रारूप तैयार कर लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास ड्राफ्ट पहुंच गया है. अब सरकार को आगे बढ़ना है. स्थानीयता की नीति एक बार फिर राजनीतिक एजेंडा बनेगा. स्थानीयता के मुद्दे से राजनीति गरमायेगी. पार्टियों को इस नीति को लेकर अपना स्टैंड साफ करना होगा. […]

रांची: सरकार द्वारा गठित कमेटी ने स्थानीय नीति का प्रारूप तैयार कर लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास ड्राफ्ट पहुंच गया है. अब सरकार को आगे बढ़ना है. स्थानीयता की नीति एक बार फिर राजनीतिक एजेंडा बनेगा. स्थानीयता के मुद्दे से राजनीति गरमायेगी.

पार्टियों को इस नीति को लेकर अपना स्टैंड साफ करना होगा. पार्टियां वोट बैंक का नफा-नुकसान तौलेंगी. झामुमो और झारखंड नामधारी छोटे दल जहां एक ओर स्थानीय नीति के सहारे एक खास वोट बैंक को गोलबंद करने की कोशिश करेंगे. वहीं भाजपा, कांग्रेस सहित दूसरे दलों की नजर दूसरे वोट बैंक पर होगी. वर्तमान ड्राफ्ट के बाद सरकार में शामिल कुछ घटक दलों को भी इस रास्ते पर बढ़ने में परेशानी हो सकती है. सरकार की ओर से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही गयी है. सर्वदलीय बैठक में पार्टियों के अलग-अलग सूर हो सकते हैं. इसके पक्ष-विपक्ष में राजनीति का मंच तैयार हो रहा है.

संवेदनशील मुद्दा है, पार्टी की बैठक कर तय करेंगे : भाजपा

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय ने कहा है कि यह काफी संवेदनशील मुद्दा है. जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होना चाहिए. अभी ड्राफ्ट की कॉपी नहीं मिली है. सर्वदलीय बैठक से पहले पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर चर्चा होगी. ड्राफ्ट की कॉपी मिलने के बाद पार्टी स्तर पर एक कमेटी बनेगी. कमेटी इसका अध्ययन कर अपना सुझाव देगी. श्री राय ने कहा कि मेरे विचार से 15 वर्ष का कट ऑफ डेट तय करना सही नहीं है. झारखंड गठन की तिथि से ही कट ऑफ डेट तय किया जाना चाहिए.

ड्राफ्ट देखेंगे, पार्टी की बैठक में होगी समीक्षा: राजद

राजद के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह ने कहा है कि स्थानीयता की नीति का ड्राफ्ट कमेटी ने तैयार कर ली है. कमेटी ने क्या अनुशंसा की है, अभी नहीं देखा हूं. पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. 15 जून को पार्टी नेताओं की बैठक है. इसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी. राजद नेता श्री सिंह ने कहा कि राज्य गठन का उद्देश्य पूरा होना चाहिए. रोजगार में यहां के लोगों को अधिकार मिलना चाहिए. राज्य में किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए.

सरकार सिर्फ विवाद को हवा देना चाहती है, मंशा साफ नहीं : झाविमो

झाविमो के महासचिव प्रवीण सिंह ने कहा है कि हर राज्य की अपनी स्थानीय नीति है. झारखंड में भी स्थानीय नीति बननी चाहिए, लेकिन सरकार इसके नाम पर केवल विवाद को हवा देना चाहती है. सरकार की मंशा साफ नहीं है. वर्तमान नीति में भी एक विभाजन रेखा बना दिया गया है. इससे समाज में विवाद होगा. सरकार को चाहिए कि वह ताजा सर्वे कराये. इस सर्वे के आधार पर कोई नीति बने. वर्तमान सरकार मूलवासी और झारखंड वासी का विभाजन कर विवाद को ही बढ़ाने का काम किया है. सरकार मूलवासी को भी कुछ देने के पक्ष में नहीं है.

जल्द हल निकले, रिपोर्ट देखेंगे तब बोलेंगे : जदयू

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो ने कहा है कि स्थानीयता का मसला हल होना चाहिए. इस पर नीति बननी चाहिए. श्री महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलायी है, तो अच्छी पहल है. पार्टी के अंदर भी इस मुद्दे पर बात होगी. हम ड्राफ्ट का अध्ययन कर ही कुछ बोलेंगे. राज्य के लोगों को हर हाल में अधिकार मिलना चाहिए.

स्थानीयता पर एकपक्षीय निर्णय गलत : सालखन

रांची. झारखंड दिशोम पार्टी के अध्यक्ष सालखन मुमरू ने कहा कि डोमिसाइल या स्थानीयता का मुद्दा आदिवासी मूलवासियों के लिए अस्तित्व का मुद्दा है. राजनीतिक दलों और नेताओं के रवैये से इसका समाधान नहीं निकल रहा है. किसी भी क्षेत्र के लोगों की पहचान उनकी भाषा संस्कृति, परंपरा और जाति के आधार पर होती है. झारखंड में आदिवासी और मूलवासी ही झारखंडी है, अत: उनकी पहचान भाषा, संस्कृति, परंपरा और जाति के आधार पर होनी चाहिए. 1932 के खतियान के आधार पर पहचान गलत है. यह सर्वे झारखंड के सभी क्षेत्रों में नहीं किया गया है. स्थानीयता के लिए तीन आधार हो सकते हैं. झारखंडी भाषा, संस्कृति परंपरा और मूलवासी की जाति सूची. जब तक नीति नहीं बनती, तब तक सभी ग्रामीणों को स्थानीय माना जाये.

स्थानीयता नीति के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग

रांची. आदिवासी मूलवासी महासभा के मुख्य संयोजक सरना धर्मगुरू बंधन तिग्गा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्थानीयता नीति के निर्धारण के लिए विशेष सत्र बुलाने और इससे पूर्व सभी सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रारूप पर चर्चा कराने की मांग की है़ डॉ करमा उरांव, एस अली ने कहा कि प्रारूप में कुछ त्रुटियां हैं, जिसे दूर करना जरूरी है़ प्रारूप में आदिवासियों और मूलवासियों के साथ साथ पिछले 29 साल से झारखंड में निवास कर रहे लोगों को भी अधिकार देना स्वागत योग्य कदम है.

स्थानीय नीति का आधार गलत : प्रेम शाही

रांची. आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा ने कहा है कि स्थानीय नीति का प्रारूप बना कर मुख्यमंत्री के पास थोपा गया है. तृतीय और चतुर्थ वर्ग के नौकरी के लिए कट ऑफ डेट पांच नवंबर 1985 रखना भी आधारहीन है. श्री शाही ने कहा कि स्थानीय नीति का आधार सामाजिक, संस्कृति और भाषा होनी चाहिए. प्रेम शाही मुंडा ने केरल में झारखंडी बच्चों की ट्रैफिकिंग पर भी चिंता करते हुए कहा कि इस प्रकरण की सीबीआइ जांच होनी चाहिए.

स्थानीयता का मामला स्पष्ट हो : कुरमी मोरचा

रांची. कुरमी विकास मोरचा की बैठक केंद्रीय कार्यालय, बूटी मोड़ में हुई. केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थानीय नीति के प्रारूप पर चर्चा की गयी. कहा गया कि अधिसूचित क्षेत्रों (शिडय़ूल्ड एरिया) में रहनेवाले मूल वासियों का क्या होगा, यह साफ नहीं किया गया है. क्या इस क्षेत्र की सभी नौकरियां केवल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगी? बैठक में कई अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा हुई. बैठक में रचिया महतो, राजेंद्र महतो, लबुलाल महतो, मुन्ना महतो व अन्य उपस्थित थे.

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