तुगलकाबाद विधानसभा से हैट्रिक लगाने की तैयारी में आप, बीजेपी भी कमर कस कर तैयार

Tughlakabad Assembly Constituency : सुल्तान तुगलक ने 14वीं सदी में एक शहर बसाया था, जिसे तुगलकाबाद कहा जाता है. आज का तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र उसी शहर में है.

  • दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान
  • 8 फरवरी को होगी मतों की गिनती

Tughlakabad Assembly Constituency : तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से एक है. यह विधानसभा क्षेत्र दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इस लोकसभा क्षेत्र में नौ अन्य विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं. वर्तमान में इस विधानभा क्षेत्र के विधायक आम आदमी पार्टी के सही राम हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में सही राम ने बीजेपी के रमेश विधूड़ी को पराजित किया था.

तुगलकाबाद से तीन बार जीती बीजेपी अब आप का कब्जा

सुल्तान तुगलक ने 14वीं सदी में एक शहर बसाया था, जिसे तुगलकाबाद कहा जाता है. आज का तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र उसी शहर में है. इस क्षेत्र में पानी की समस्या सबसे अहम मुद्दों में से एक है. जब बीजेपी के रमेश विधूड़ी यहां से सांसद हुआ करते थे, उस वक्त भी इलाके में पानी की समस्या थी और आम आदमी पार्टी का विधायक चुने जाने के बाद भी इलाके में जलसंकट में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता है. 2015 से इस सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है और सही राम पहलवान यहां से विधायक चुने गए हैं. उनसे पहले तीन बार बीजेपी के रमेश विधूड़ी यहां से विधायक रहे थे. तुगलकाबाद सीट दिल्ली की 52 अनारक्षित सीटों में से एक है. आप ने एक बार फिर सही राम पर भरोसा दिखाया है, जबकि बीजेपी ने रमेश विधूड़ी को कालकाजी से टिकट दिया है और अभी तक इस सीट के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं.

2002 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया सीट

तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान में जो भौगोलिक संरचना है वह 2002 के परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर बनी है और यह संरचना 2008 से अस्तित्व में आई है. दक्षिण दिल्ली का यह निर्वाचन क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. तुगलकाबाद के अलावा जो नौ अन्य विधानसभा सीटें दक्षिण दिल्ली में आती हैं वे हैं-

  • बिजवासन
  • संगम विहार
  • अंबेडकर नगर
  • छतरपुर
  • देवली
  • कालकाजी
  • पालम
  • बदरपुर
  • महरौली

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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