डॉ हर्षवर्धन को कृष्णा नगर के मतदाताओं ने 5 बार बनाया विधायक, अब बीजेपी से नाराज; इस बार कांटे की टक्कर

KRISHNA NAGAR Assembly constituency : कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र बीजेपी का किला हुआ करता था. 1993 से 2013 तक इस सीट से बीजेपी के डॉ हर्षवर्धन विधायक रहे. उनके सांसद बन जाने के बाद यह सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई है.

  • दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान
  • 8 फरवरी को होगी मतों की गिनती

KRISHNA NAGAR Assembly constituency : कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के उन विधानसभा क्षेत्रों में से एक है, जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है.लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनाव से आम आदमी पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र पर अपना कब्जा जमा लिया है. इस विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में आप आदमी पार्टी के विधायक एसके बग्गा हैं. दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, जिनमें से कृष्णानगर सीट पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. कृष्णा नगर दिल्ली के पूर्वी इलाके में स्थित विधानसभा क्षेत्र है जिसे ट्रांस-यमुना क्षेत्र भी कहा जाता है. यह विधानसभा क्षेत्र शहरी इलाके में है.

कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास

कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र बीजेपी का किला हुआ करता था. 1993 से 2013 तक इस सीट से बीजेपी के डॉ हर्षवर्धन विधायक रहे. उनके सांसद बन जाने के बाद यह सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई है. 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर से आप नेता एसके बग्गा विजयी हुए थे उन्हें कुल 72,111 वोट मिले थे. बग्गा ने बीजेपी के डॉ अनिल गोयल को पराजित किया था, उन्हें 68,116 वोट मिले थे. कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ अशोक कुमार वालिया की स्थिति बहुत ही खराब रही थी उन्हें मात्र 5,079 वोट ही मिले थे. 2015 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब ही यहां से आप ही चुनाव जीती थी. एसके बग्गा ने उस चुनाव में बीजेपी की नेता और कद्दावर आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को पराजित किया था.यह चुनाव भी सीधी टक्कर का ही था.

कृष्णा नगर : हैट्रिक लगाने की तैयारी में आप

कृष्णानगर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी इस बार लगातार तीसरी जीत दर्ज करके हैट्रिक लगाने के मूड में है. आप ने एसके बग्गा पर एक बार विश्वास जताया है,चूंकि इस सीट के मतदाता एक चेहरे को पसंद करते हैं इसलिए बग्गा की उम्मीदवारी मजबूत ही मानी जाएगी. वहीं बीजेपी ने भी डॉ अनिल गोयल पर भरोसा जताया है. बीजेपी की कोशिश यह होगी कि वह अपने किले को एक बार फिर फतह कर ले. जबकि कांग्रेस ने गुरचरण सिंह राजू को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन मुकाबला सीधी टक्कर वाला ही नजर आ रहा है.

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By Rajneesh anand

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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