दिल्ली के मंत्री गोपाल राय का दावा : एमसीडी की सत्ता में आए, तो 5 साल में साफ कर देंगे 'कूड़े का पहाड़'

आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली इकाई के संयोजक एवं पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को अपने दावे में कहा कि एमसीडी में सत्ता में आने पर उनकी पार्टी पांच साल के भीतर शहर की कचरा प्रबंधन समस्या का समाधान कर देगी. उन्होंने कहा कि भाजपा एमसीडी में अपने 15 साल के कार्यकाल में विफल रही है.

नई दिल्ली : भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही राष्ट्रीय राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया है. इस बार के एमसीडी चुनाव में कूड़े का पहाड़ राजनीतिक दलों के मुख्य एजेंडे में शामिल दिखाई दे रहा है. इसे लेकर एमसीडी में सत्तासीन भाजपा दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप मढ़ रही है कि उसने एमसीडी को पैसा नहीं दिया, इसलिए यह कूड़े का पहाड़ दिखाई दे रहा है. वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) भाजपा पर दोषारोपण कर रही है. इस बीच, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को दावा किया है कि एमसीडी की सत्ता में आम आदमी पार्टी के आते ही पांच साल के अंदर दिल्ली से कूड़े का पहाड़ पूरी तरह साफ हो जाएगा.

केजरीवाल की 10 गारंटी

आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली इकाई के संयोजक एवं पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को अपने दावे में कहा कि एमसीडी में सत्ता में आने पर उनकी पार्टी पांच साल के भीतर शहर की कचरा प्रबंधन समस्या का समाधान कर देगी. उन्होंने कहा कि भाजपा एमसीडी में अपने 15 साल के कार्यकाल में विफल रही है. पार्टी ने इस महीने की शुरुआत में चार दिसंबर को होने वाले एमसीडी चुनाव के लिए ‘केजरीवाल की 10 गारंटी’ जारी की थी, जिसमें कूड़े के तीन पहाड़ों (लैंडफिल साइट) को हटाने और राजधानी में कचरा कुप्रबंधन की समस्या का समाधान करने का वादा किया गया है.

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की ली जाएगी मदद

यह पूछे जाने पर कि पार्टी कचरे के मुद्दे पर क्यों ध्यान केंद्रित कर रही है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ‘आप’ नहीं, बल्कि दिल्ली के लोग हैं, जो इस मुद्दे को उठा रहे हैं. ‘आप’ की वरिष्ठ नेता आतिशी ने इससे पहले कहा था कि पार्टी कूड़े के तीन पहाड़ों के आकार को कम करने के समाधान खोजने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेगी. गोपाल राय ने उनसे सहमति जताते हुए कहा कि ऐसे कई देश हैं, जो कचरा प्रबंधन के लिए तकनीकी समाधान लेकर आए हैं.

मशीन से साफ करेंगे कूड़े का पहाड़

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि मैंने कुछ समय पहले स्वीडन का दौरा किया था और यह एक ऐसा देश है, जो किसी समय प्रदूषित हुआ करता था. वहां घरों से एकत्रित कचरा सीधे उपचार संयंत्रों में जाता है. वे इसे ऊर्जा और उर्वरक में बदल देते हैं. पार्टी की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए गोपाल राय ने कहा कि वे दिल्ली में ऐसे उपचार संयंत्र लगाएंगे, जहां घरों से इकट्ठा किया गया कचरा सीधे वहीं फेंका जाएगा और बिजली बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि हम लैंडफिल साइट (कूड़े के पहाड़) को साफ करने के लिए और मशीन लगाएंगे. आम आदमी पार्टी अगले पांच साल में वे काम करेगी जो भाजपा एमसीडी में अपने पिछले 15 सालों के शासन में नहीं कर पाई है.

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दिल्ली में डेंगू के 3,044 मामले दर्ज

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल डेंगू के 3,044 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2021 में 9,613 मामले सामने आए थे. उन्होंने कहा कि डेंगू कोई अलग समस्या नहीं है. यह स्वच्छता से जुड़ा मुद्दा है. यदि दिल्ली में स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखा जाए और सुधार किया जाए, तो डेंगू की समस्या का समाधान किया जा सकता है. डेंगू, मलेरिया जैसी सभी तरह की बीमारियों का समाधान साफ-सफाई में ही है. अगर इनका सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो समस्या का समाधान हो जाएगा.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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