Arvind Kejriwal : कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की रिमांड 3 जुलाई तक के लिए बढ़ाई

रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अरविंद केजरीवाल की तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई. ईडी ने 21 मार्च को उन्हें गिरफ्तार किया था.

Arvind Kejriwal : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत तीन जुलाई तक के लिए बढ़ा दी गई है. 19 जून को उनकी हिरासत अवधि समाप्त हो रही थी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान उनकी न्यायिक हिरासत अवधि को बढ़ा दिया है. गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल की गिफ्तारी 21 मार्च को ईडी ने की थी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था.

लोकसभा चुनाव के दौरान मिली थी जमानत

अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के दौरान जमानत दी थी. कोर्ट ने यह कहा था कि लोकसभा चुनाव बड़ा अवसर है और अरविंद केजरीवाल को चुनाव प्रचार करने की इजाजत मिलनी चाहिए. कोर्ट ने उस वक्त यह टिप्पणी भी की थी कि केजरीवाल आदतन अपराधी नहीं है, वे एक चुनी हुई सरकार के मुखिया हैं.

अरविंद केजरीवाल ने नहीं छोड़ा है सीएम पद

शराब घोटाला मामले में गिरफ्तारी के बाद भी अरविंद केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफा नहीं दिया है. उन्होंने जमानत के दौरान बयान जारी कर कहा था कि मैं जेल से ही सीएम का कामकाज देखूंगा. यह मेरे संघर्ष का हिस्सा है. केजरीवाल ने यह भी कहा था कि शराब घोटाला फर्जी है, यह कहानी बनाई गई है. अगर हमने कुछ गलत किया है, तो वो दिखना चाहिए. कोई बरामदगी नहीं हुई है, कोई संपत्ति नहीं मिली है. अगर हमने कुछ गलत किया है, तो कुछ तो दिखेगा ना, कुछ सामान खरीदा होगा, जेवरात लिए होंगे. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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