इस साल जून और जुलाई में छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार के मामले सामने आए. कांकेर और बीजापुर में अलग-अलग जगहों से तीन बाघों की खाल बरामद हुई. इस मामले में वन विभाग ने कार्रवाई की है. वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि तस्कर बाघों की खाल और पंजों की तस्करी कर रहे थे. खासकर महाराष्ट्र सीमा के पास ऐसी घटनाएं सामने आईं. मामले में अधिकारियों की मिलीभगत भी मिली. इसके बाद दोषी अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया.
मंत्री ने कहा कि कार्रवाई का मकसद मामले की पूरी सच्चाई सामने लाना है. उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान वनकर्मियों ने सीमावर्ती गांवों में तलाशी अभियान चलाया. इसका उद्देश्य बाघों के शिकार की किसी और घटना का पता लगाना था. वन विभाग की टीमों ने कई इलाकों की जांच की. हालांकि, तलाशी के दौरान बाघ के शिकार का कोई नया मामला सामने नहीं आया.
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा, ‘‘हालांकि, इस पूरे मामले में दूसरे राज्यों के लोग या अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी शामिल हो सकते हैं. इसलिए हमने दोषियों को सजा दिलाने के लिए मामला सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है. एक बार सीबीआई जांच शुरू कर देगी तो हमें निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे.’’
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी
कश्यप ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण में छत्तीसगढ़ ने अच्छी प्रगति की है. राज्य में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है. साल 2022 में यहां 18 बाघ थे. 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 35 हो गई. यानी चार साल में बाघों की संख्या करीब 94 फीसदी बढ़ी है. उन्होंने बताया कि गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है. इसका क्षेत्रफल 2,829.387 वर्ग किलोमीटर है. इसे 2024 में बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था.
कश्यप ने कहा, ‘‘वर्तमान में इंद्रावती में हमारे राजकीय पशु वन भैंसे 14 से 17 की संख्या में प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं, जबकि असम से लाए गए वन भैंसों की संख्या छह से बढ़कर 11 हो गई है. राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 दर्ज की गई है और ‘मैना मित्र’ योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान की गई है.’’
कश्यप ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बांधवगढ़ से तीन बाघिनों को छत्तीसगढ़ लाने की अनुमति दी है. इसके लिए बाड़े और पेट्रोलिंग कैंप तैयार हैं तथा बारिश के बाद उनका स्थानांतरण किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी.
