झीरम घाटी नरसंहार: 13 साल, 101 गवाह और 31 मौतें

जिस वक्त छत्तीसगढ़ में यह खौफनाक हमला हुआ, उस समय राज्य में रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार सत्ता में थी. इस निर्मम हमले ने कांग्रेस को ऐसा गहरा जख्म दिया, जिसमें पार्टी की तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व की पूरी कतार ही खत्म हो गई.

जगदलपुर विशेष एनआईए अदालत 2013 के चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में 5 सितंबर (शनिवार) को फैसला सुनाएगा. इस मामले में लंबे समय से चल रही सुनवाई की अंतिम दलीलें 12 अगस्त को पूरी हो गई थीं. इसके बाद अदालत को 31 अगस्त को फैसला सुनाना था, लेकिन फैसला टल गया. अब 5 सितंबर यानी आज फैसला आने की उम्मीद है.

कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा में बड़ी सभा के बाद लौट रहा था. इसी दौरान झीरम घाटी के घने जंगलों में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया. इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी.


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मरने वालों में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. हमले में कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी मारे गए थे. गंभीर गोली लगने के बाद इलाज के दौरान विद्याचरण शुक्ल की भी मौत हो गई थी.

अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए

एनआईए ने इस मामले में 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के नाम शामिल थे. इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद एनआईए ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई. वहीं, 33 नामजद आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं. अंतिम दलीलें पूरी होने से पहले अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए.

बीजेपी पर भूपेश बघेल ने लगाए आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि झीरम हत्याकांड के असली साजिशकर्ताओं को बचाने के लिए जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की गई.

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By अमिताभ कुमार

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