मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर के मेफेयर लेक रिजॉर्ट में केंद्रीय खान मंत्रालय की ओर से आयोजित महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि राज्य की खनिज संपदा और महत्वपूर्ण खनिजों की उभरती संभावनाएं निवेश आकर्षित करने, नए उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम हैं.
मुख्यमंत्री ने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल लॉन्च किया
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल भी लॉन्च किया. ई-रेत संगवारी पोर्टल के जरिए प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को रियायती दरों पर रेत की आपूर्ति की सुविधा मिलेगी. वहीं, टिन पोर्टल को दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने और प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है.
भारत तेजी से आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में हो रहा मजबूत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से एक प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और प्रसंस्करण तथा इन पर आधारित उन्नत उद्योगों के विकास को गति दी है. उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में प्रमुख देश रणनीतिक संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने में जुटे हैं. ऐसे में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के मामले में आत्मनिर्भरता भारत के आर्थिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है.
खनिज नई अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम
सीएम ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज नई अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम हैं. रक्षा और एआई से लेकर सेमीकंडक्टर, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल तकनीक और उन्नत विनिर्माण तक इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक ने भी रणनीतिक खनिजों की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति की जरूरत को रेखांकित किया है. लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकल और क्रोमियम भविष्य की अर्थव्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
इन क्षेत्रों में खनिजों की बड़ी संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कटघोरा और बस्तर में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम और गैलियम, बालोद में फॉस्फोराइट तथा महासमुंद में निकल, क्रोमियम और ग्लॉकोनाइट की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की आठवीं किश्त में सात राज्यों के 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के पांच ब्लॉक हैं. उन्होंने निवेशकों से नीलामी में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की. उन्होंने इन ब्लॉकों को राज्य में खनिजों की खोज, प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, नवाचार और नए उद्योगों के विकास का अवसर बताया.
छत्तीसगढ़ में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपनी नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के उपायों के जरिए निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है. निवेशकों को पूंजी निवेश सहायता, स्टांप ड्यूटी और बिजली शुल्क में छूट, ब्याज सब्सिडी और रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन सहित कई सुविधाएं उपलब्ध हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य बनने के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था. ढाई साल पहले यह करीब 12,000 करोड़ रुपये था और अब बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल विकास और जनकल्याण के लिए किया जा रहा है. इसमें जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में परियोजनाएं भी शामिल हैं.
खनिजों में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत के लिए जरूरी है. उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में अवसर तलाशने की अपील की. साथ ही जिम्मेदार खनन तथा पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा पर जोर दिया.
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि खनिज ब्लॉकों की नीलामी की सफलता का असर खनिजों की खोज, निवेश, प्रसंस्करण सुविधाओं, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने खनन और औद्योगिक निवेश वाले क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के सुनियोजित विकास पर भी जोर दिया.
राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी मंजूरियों के लिए निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी मंजूरियों के लिए निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी. उन्होंने निवेशकों से केवल खनन तक सीमित न रहकर पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश पर विचार करने की अपील की.
केंद्रीय खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने कहा कि अब तक देशभर में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के 88 ब्लॉकों को नीलामी के लिए रखा जा चुका है, जिनमें से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हुई है. उन्होंने कहा कि भारत में नीलामी के लिए रखा गया पहला लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक छत्तीसगढ़ का कटघोरा लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक था.
ढाई साल में शुरू हुए 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट
खनिज संसाधन सचिव पी. दयानंद ने कहा कि राज्य वैज्ञानिक खोज, भूवैज्ञानिक आंकड़ों के संग्रह, मैपिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, ताकि खनिज आधारित उद्योगों, स्थानीय रोजगार और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा सके.
खनिज संसाधन निदेशक एवं सीएमडीसी के प्रबंध निदेशक रजत बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य में टिकाऊ खनन प्रथाओं के साथ-साथ खनिज संसाधनों की वैज्ञानिक खोज पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में छत्तीसगढ़ को करीब 16,700 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला, जो लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है. खनिज राजस्व में साल-दर-साल करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरे किए गए हैं. अब तक 65 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है, जिनसे संभावित राजस्व करीब 4 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, सोना, टंगस्टन, निकल, क्रोमियम, तांबा, लेड-जिंक और हीरे की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं. कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम और बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में खोज और नीलामी की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं.
डिजिटल सिस्टम खानिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी ने खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है. वहीं, खदानों और लघु खनिजों की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का इस्तेमाल किया जा रहा है.
दो एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दौरान दो एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए. छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने वित्तीय सहयोग के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ समझौता किया. वहीं, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एक अन्य एमओयू के तहत कोरंडम कटिंग और पॉलिशिंग में प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इस अवसर पर लघु खनिजों पर एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया. इसके अलावा तीन चूना पत्थर खनन लीज ब्लॉकों के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई.
कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव कदम संदीप वसंत, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र के निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक मौजूद रहे.
