छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप लगा. छात्रों ने इसकी शिकायत की. मामला तब बढ़ गया, जब प्रिंसिपल के कार्यालय में इस मुद्दे पर बहस के दौरान एक छात्र वीडियो बनाने लगा. आरोप है कि प्रिंसिपल ने छात्र को थप्पड़ मार दिया. इसके बाद प्रिंसिपल को पद से हटा दिया गया.
शिक्षक शराब के नशे में स्कूल आते थे, छात्रों का आरोप
पं. चक्रपाणि बहुउद्देशीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में विवाद विज्ञान के शिक्षक पर लगे आरोपों से शुरू हुआ. वे कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाते हैं. शिकायत सामने आने के बाद मामला बढ़ता गया. इसके बाद छात्रों की सुरक्षा, शिकायतों पर कार्रवाई और स्कूल प्रबंधन के कामकाज को लेकर भी सवाल उठने लगे. छात्रों का आरोप है कि शिक्षक शराब के नशे में स्कूल आते थे. उन्होंने कुछ छात्राओं के साथ गलत भाषा का इस्तेमाल करने और मारपीट करने की भी शिकायत की. छात्रों का यह भी कहना है कि शिक्षक के खिलाफ शिकायत करने वालों को फेल करने की धमकी दी जाती थी.
शिक्षक के शराब के नशे में पाए जाने की बात सामने आई : कलेक्टर कुलदीप शर्मा
बलौदाबाजार के कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि प्रशासन ने पूरे मामले को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जांच शुरू की है. कलेक्टर ने बताया कि शिक्षक से जुड़े मामले की जांच की गई है. जांच में शिक्षक के शराब के नशे में पाए जाने की बात सामने आई है. उनके खिलाफ निलंबन की सिफारिश के साथ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है. हालांकि, मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों की अभी जांच चल रही है और इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है.
प्रिंसिपल ने थप्पड़ मार दिया, छात्र का आरोप
मामला उस समय और बढ़ गया, जब छात्र और उनके माता-पिता अपनी शिकायत लेकर प्रिंसिपल के पास पहुंचे. इसी दौरान कुछ मीडियाकर्मी भी स्कूल पहुंचे और प्रबंधन से पूरे मामले पर जानकारी लेने की कोशिश की. प्रिंसिपल के कमरे में शिकायतों को लेकर बहस के दौरान एक छात्र ने मोबाइल से पूरी बातचीत रिकॉर्ड करनी शुरू कर दी. प्रिंसिपल ने उसे वीडियो बनाने से रोकते हुए कहा कि यह उनका आदेश है. छात्र के रिकॉर्डिंग जारी रखने पर आरोप है कि प्रिंसिपल ने उसे थप्पड़ मार दिया.
इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिससे मामला और चर्चा में आ गया. इसके बाद जांच सिर्फ शिक्षक पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छात्रों की शिकायत पर स्कूल प्रबंधन ने किस तरह कार्रवाई की, इसे लेकर भी सवाल उठने लगे.
