Nepal Flood vs Bihar flood : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का असर बिहार के कई जिलों में भी देखने को मिला. बाढ़ का पानी कई इलाकों में परेशानी का कारण बना, लेकिन पानी के साथ बहकर आया मलबा और गंदगी अब स्वास्थ्य के लिए नई चुनौती बन रही है. इसी बीच नेपाल की ओर से बाढ़ के पानी के साथ बिहार पहुंची अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों को लेकर सरकार ने लोगों को सतर्क किया है. लोगों से ऐसी मछलियों को नहीं खाने की अपील की गयी है.
बाढ़ के पानी के साथ क्यों खतरनाक हो सकती हैं मछलियां?
जनरल फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी के अनुसार, बाढ़ के पानी के साथ बहकर आने वाली मछलियों को खाने में सावधानी बरतना जरूरी है. उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी सिर्फ साफ पानी नहीं होता. इसमें सीवरेज का पानी, गंदगी और कई तरह के जैविक पदार्थ मिल जाते हैं. कई जगहों पर मृत पशु और अन्य डीकंपोज्ड सामग्री भी पानी में बहती रहती है.
ऐसे दूषित वातावरण में रहने वाली मछलियों के शरीर में बैक्टीरिया, फंगस और अन्य संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं. इसलिए बिना जांच या उचित जानकारी के ऐसी मछलियों को खाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
संक्रमण से हो सकती है गंभीर परेशानी
डॉक्टर ने बताया कि दूषित मछली खाने से पेट और आंत से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इसके कारण डायरिया, पेचिश, उल्टी और मितली जैसी समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है.
उन्होंने कहा कि संक्रमण की वजह से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है. यदि समय पर इलाज नहीं मिला तो स्थिति गंभीर हो सकती है. इसलिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता. पानी में मौजूद गंदगी और दूषित पदार्थ आसपास के वातावरण में रह जाते हैं. इससे पीने के पानी के दूषित होने और संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है.
विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. बाढ़ प्रभावित लोगों को साफ पानी पीने, भोजन को ढककर रखने और संदिग्ध खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
बाढ़ पीड़ितों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इस दौरान लोगों को अपने साथ जरूरी दवाएं रखनी चाहिए और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
डायरिया, लगातार उल्टी, तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर लगातार उल्टी-दस्त होने की स्थिति में शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है.
बाढ़ के पानी में मृत पशुओं से भी बढ़ता है संक्रमण का खतरा
बाढ़ के दौरान मृत पशु और अन्य जैविक पदार्थ भी पानी में बहते हैं. इनके सड़ने से पानी में कई प्रकार के हानिकारक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं. यही वजह है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी और खाद्य पदार्थों की स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
संदिग्ध मछली दिखे तो खाने से बचें
नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ आयी ऐसी मछलियां, जो स्थानीय लोगों के लिए अपरिचित हैं, उन्हें लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. डॉक्टर की सलाह के मुताबिक, जब तक ऐसी मछलियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जानकारी न हो, लोगों को इन्हें खाने से बचना चाहिए.
बाढ़ के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पानी से निकलना नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले स्वास्थ्य संकट से बचना भी है. प्रशासन की ओर से जारी स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करना और दूषित पानी व संदिग्ध खाद्य पदार्थों से दूरी रखना बेहद जरूरी है.
पटना से राजकमल की रिपोर्ट.
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