बेलुवग्राम महोत्सव में इतिहास से कराया अवगत

पटेढ़ी बेलसर/नगवां : बज्जिकांचल तीन धर्मों की त्रिवेणी भूमि है. सनातन, जैन और बौद्ध धर्म का उदय यहीं से हुआ था. बाद के दिनों में इसलाम धर्म भी यहां आये. इसलाम धर्म में औलिया, पीर और फकीर धर्म का प्रचार-प्रसार यहां हुआ. फना गांव जो आज फना गोरैया के नाम से जाना जाता है, यह […]

पटेढ़ी बेलसर/नगवां : बज्जिकांचल तीन धर्मों की त्रिवेणी भूमि है. सनातन, जैन और बौद्ध धर्म का उदय यहीं से हुआ था. बाद के दिनों में इसलाम धर्म भी यहां आये. इसलाम धर्म में औलिया, पीर और फकीर धर्म का प्रचार-प्रसार यहां हुआ. फना गांव जो आज फना गोरैया के नाम से जाना जाता है, यह सूफियों की निर्माण भूमि रही है. ये बातें इतिहासकार सच्चिदानंद चौधरी ने सोमवार को प्रखंड के बेलवर गांव के सती स्थान पर बेलुवग्राम महोत्सव को संबोधित करते हुए कहीं.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बज्जिकांचल की अनदेखी कर रही है. भगवान बुद्ध का महापरायण कुशीनगर नगर नहीं बल्कि कुशी है, जो मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना अंतर्गत पड़ता है. महोत्सव की अध्यक्षता प्राकृत जैनशास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान वैशाली के निदेशक डॉ ऋषभ चंद्र जैन ने की. इतिहासकारों ने कहा कि यहां पर जैनी पोखर पहले हुआ करता था, जो अब इसका नाम डैनी पोखर हो गया.

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