हाजीपुर : महात्मा गांधी सेतु के पाया संख्या 35 के समीप बुधवार की अहले सुबह जिस तरह अचानक चलती कार में आग लगी और धू-धूकर कार जल कर राख हो गयी. अगर थोड़ी और विलंब होता तो कार के साथ तीनों लोग जिंदा जल जाते! कार का मालिक सह चालक व पटना आरडब्लू डी से रिटायर्ड इंजीनियर जनक राम की माने तो यह तो शुक्र था कि सेतु के पूर्वी लेन से गुजर रहे कुछ वाहन चालकों ने उन्हें इंजन में लगी आग की जानकारी का संकेत दे दिया. वरना कार के साथ वे,
उनकी पत्नी और पुत्र जिंदा जल जाते. श्रीराम की माने तो सेतु पर चढ़ने के दौरान ही उनकी कार के इंजन से धुआं निकलने लगा था, जिसका उन्हें तनिक भी आभास नहीं हुआ था. सेतु पर पाया संख्या 44 से लेकर 39 के बीच वन-वे-ट्रैफिक व्यवस्था है. उनकी कार वहां से हाजीपुर की ओर बढ़ रही थी. इस दौरान पटना की ओर जा रहे कुछ वाहन चालकों को इशारों-इशारे में कुछ कहने का प्रयास करते हुए उन्होंने देखा, लेकिन वे समझ नहीं पाये थे. जब वे वन-वे-ट्रैफिक पार कर पाया संख्या 36 के समीप से गुजर रहे थे तो एक कार चालक ने ओवरटेक कर कार के इंजन से धुआं निकलने की उन्हें जानकारी दी.
उन्होंने कार को रोक दी और बिना समय गवाएं चालक सीट की ओर से कार का गेट खोल कर बाहर निकले. सबसे पहले आग को बुझाने के लिए कार का बाेनट खोलने का प्रयास किया. जब बोनट नहीं खुला तब उन्होंने कार की पिछली सीट पर बैठे पत्नी और बेटे जिम्मी रंजन को बाहर निकलने का ख्याल आया लेकिन वे उस समय घबरा गये, जब कार के पीछे वाली दोनों गेट तथा ड्राइवर सीट की बगल वाली सीट का गेट लॉक हो गया था. चालक सीट वाली गेट उन्होंने पहले ही खोल रखा था और उसी गेट से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला. श्री राम मानते है कि अगर कार का बोनट खुल जाता तो संभव था कि इंजन में लगी आग पर प्रारंभिक दौड़ में काबू पा लिया जाता. सेतु पर तैनात पुलिस के जवान वहां सहायता के लिए पहुंच गये थे.
