परेशानी. बढ़ी आबादी, लेकिन घट रहे सफाईकर्मी
हाजीपुर : मैन पावर की कमी झेल रहा नगर पर्षद नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेवारियां निभाने में नाकाम साबित हो रहा है. कर्मियों के अभाव में नगर की साफ-सफाई से लेकर विकास के अन्य कार्य बुरी तरह बाधित हो रहे हैं. सड़क, नाला, पेयजल और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं से नागरिकों को निजात नहीं मिल पा रही है. नतीजतन, लोगों के अंदर अपने प्रतिनिधि और नगर पर्षद के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है.
सौ से भी कम हो गये कर्मी : लगभग 50 साल पहले से ही नगर पर्षद में विभिन्न कोटि के कर्मचारियों के 230 पद स्वीकृत हैं. इन 50 वर्षों में नगर क्षेत्र की आबादी में तीन गुनी बढ़ोतरी हुई है. न सिर्फ नगर क्षेत्र का दायरा बढ़ा है, बल्कि वार्डों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. तब हाजीपुर नगरपालिका में कुल 18 वार्ड थे.
आज वार्डों की संख्या 39 है. इस लिहाज से मौजूदा परिस्थिति में नगर पर्षद को कम-से-कम 500 कर्मियों की आवश्यकता है. वहीं, वर्तमान में इसके कर्मियों की संख्या 100 के करीब है. लगभग तीन साल पहले 10 कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद कार्यालय का काम भी निबटाना मुश्किल हो रहा है. कार्यालय के कर्मचारियों में जो बच गये हैं, उनसे कार्यालय के कार्यों के अलावा कर संग्रह का काम भी लिया जा रहा है. इस स्थिति में नगर पर्षद जन सुविधाओं से जुड़े कार्यों का निष्पादन सही तरीके से नहीं कर पा रहा है.
आबादी बढ़ी तिगुनी : नगर पर्षद में सफाई कर्मचारियों का घोर अभाव है. जब नगर क्षेत्र की आबादी लगभग 60 हजार थी, तब नगरपालिका में सफाईकर्मियों की तादाद 150 से अधिक थी. आज क्षेत्र की आबादी
एक लाख 90 हजार के करीब है. वहीं, नगर पर्षद में सफाई कर्मचारियों की संख्या घट कर 71 रह गयी है. सफाई कर्मचारियों के अभाव में नगर पर्षद ने सफाई कार्य का जिम्मा एनजीओ को सौंप रखा है. पर्षद चाहे जो दावा करे, लेकिन नगर का एक भी वार्ड ऐसा नहीं, जहां साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक हो. उधर, सफाई के नाम पर नगर पर्षद लाखों रुपये खर्च कर रहा है. इधर नगर के लोग गंदगी और यत्र-तत्र पसरे कूड़े-कचरे के बीच जीवन बसर कर रहे हैं.
नाले के अभाव में सड़कों पर होता है जलजमाव : नगर के ज्यादातर मोहल्लों में अभी तक नाले का निर्माण नहीं हो सका है. इसके चलते वहां से पानी निकलना संभव नहीं हो पाता. नाले के अभाव में नगर के दर्जनों मोहल्लों में सड़क पर जलजमाव बना रहता है. बरसात के मौसम में लोगों की और दुर्गति होती है. शहर के पोखरा मुहल्ला, शाही कॉलोनी, वीर कुंवर सिंह कॉलोनी, चौहट्टा, सांचीपट्टी, बागमल्ली समेत अन्य इलाकों में सड़कों पर पानी जमा होने के कारण लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. इन इलाकों के परेशान हाल लोग कहते हैं कि नगर पर्षद को प्राथमिकता के आधार पर नाला निर्माण का कार्य करना चाहिए.
मात्र 71 सफाईकर्मियों के जिम्मे पूरे शहर की सफाई
वार्डों की संख्या 18 से बढ़ कर हो गयी 39, लेकिन नहीं बढ़े संसाधन
500 सफाईकर्मियों की है आवश्यकता
कभी नहीं हो पा रही गली-मुहल्लों की मुकम्मल साफ-सफाई
सफाई व्यवस्था हो रही बाधित
सफाई कर्मियों की संख्या में लगातार की कमी से शहर के मुहल्ले और गलियों की सफाई पर बुरा असर पड़ रहा है. जगह-जगह कूड़े का अंबार इस बात को बताने के लिए काफी है कि यहां यह इंतजाम सही नहीं चल रहा. वैसे नगर पर्षद ने सफाई के काम में एक एनजीओ को ठेका भी दे रखा है, लेकिन वह भी सिर्फ मुख्य सड़कों पर ही अपना काम करना ड्यूटी समझ रहा है. इन्हें देखनेवाला कोई नहीं. मुहल्ले और गलियों में सफाई नहीं होने से लोगों को सड़ांध भरी जिंदगी जीनी पड़ रहा है. पहले से जमा कचरा अब बरसात के कारण सड़ कर बदबू पैदा करने लगा है.
