कई मेडल जीतनेवाला धावक हार रहा जिंदगी की दौड़

आर्थिक स्थिति से जूझने के बावजूद अरुण अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं मुड़ा साइकिल मरम्मत की दुकान चलानेवाले अरुण ने मैराथन में हासिल किये हैं कई पदक मनोहर कुमार देसरी : अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुकाम पाया जा सकता है पत्थर पर पौधा उगाया जा सकता है. इसी की मिसाल पेश […]

आर्थिक स्थिति से जूझने के बावजूद अरुण अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं मुड़ा

साइकिल मरम्मत की दुकान चलानेवाले अरुण ने मैराथन में हासिल किये हैं कई पदक

मनोहर कुमार

देसरी : अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुकाम पाया जा सकता है पत्थर पर पौधा उगाया जा सकता है. इसी की मिसाल पेश कर रहा है अरुण सहनी, जो वैशाली जिले के देसरी प्रखंड के गाजीपुर का रहनेवाला है.

वह गाजीपुर चौक पर अपने भाई प्रभु सहनी के साथ साइकिल मरम्मत करने और पंक्चर बनाने की दुकान में बतौर मिस्त्री का काम करता है. साइकिल की दुकान में मिस्त्री का काम कर अपने मुकाम हासिल करने का सपना संजोये अरुण सहनी मैराथन दौर में धावक के रुप में हिस्सा लेकर कई पदक और मेडल जीत चुका है.

उसकी लगन, मेहनत से स्थानीय लोग कायल हैं. वह हमेशा अपने मुकाम को हासिल करने के लिए अपने परिश्रम के बल पर तत्पर रहता है. धावक अरुण ने देश के कई प्रांतों में मैराथन दौड़ में धावक के रूप में भाग लेकर अच्छे स्थान प्राप्त कर जिला ही नहीं, पूरे राज्य का नाम रोशन करने का काम किया है.

देश के राजधानी से लेकर कई अन्य प्रांतों में दौड़ लगायी : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कई अन्य जगहों पर हाफ और फुल मैराथन में भाग लेने वाले युवक अरुण ने पिछले वर्ष छह दिसंबर, 2015 को 30 पुणे इंटरनेशनल मैराथन में छठा स्थान प्राप्त किया. वहीं स्टैंडर्ड चारटेरेड मुंबई मैराथन में 42.19 किलोमीटर की दौड़ दिनांक 18 जनवरी 2015 को दो घंटा 54 मिनट 28 सेकेंड में दौड़ कर चौथा स्थान प्राप्त किया था. इसी दौर में 19 जनवरी 2014 को 2 घंटा 33 मिनट 8 सेकेंड में 42.19 किमी की दूरी तय कर तीसरा स्थान प्राप्त किया था.

सरकारी स्तर पर मदद नहीं मिलने से परिवार में निराशा : धावक अरुण की स्थिति आर्थिक रूप से काफी पिछड़े होने के बावजूद इस होनहार युवक को सरकारी स्तर से कोई आवश्यक मदद नहीं मिलने के कारण उनके पारिवारिक सदस्यों में कभी-कभी निराशा होने लगती है.

मैराथन दौड़ में परचम लहराने वाले युवक के भाई प्रभु सहनी का कहना है कि मजदूरी और साइकिल का पंक्चर बना कर परिवार चलाने की विवशता के बावजूद हमारा भाई मैराथन दौर में अपने परिश्रम के बल पर उच्च मुकाम हासिल कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाना चाहता है. वह देश के कई राज्यों में दौड़कर अच्छे स्थान प्राप्त किया है, जिसमें वह पदक और मेडल भी जीत चुका है. लेकिन सरकारी स्तर से मदद नहीं मिलने से हमलोगों में कभी-कभी आशाएं टूटने लगती है.

स्थानीय विधायक सह कला संस्कृति मंत्री से है उम्मीद : धावक अरूण को उम्मीद है कि स्थानीय विधायक शिवचंद्र राम, कला, संस्कृति एवं युवा मामले के मंत्री बने हैं, जो उन्हें आवश्यक सरकारी सुविधा मुहैया करायेंगे, जिससे की वह मैराथन की तैयारी कर सके. धावक युवक साइकिल का पंक्चर बना कर देश के लिए मैराथन में दौड़ लगाने और स्वर्ण पदक का सपना संजोये हुए है.

युवक का कहना है कि मैं तो लगातार मेहनत कर देश के लिए मैराथन में दौड़कर अपना लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयत्नशील हूं, लेकिन सरकारी स्तर से अभी कोई मदद नहीं मिल रही है. मैंने पूर्व में राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायकों तथा संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी. अब स्थानीय विधायक सह सूबे में मंत्री शिवचंद्र राम से हमें उम्मीद है कि वह हरसंभव मदद करेंगे.

सबसे पहले हैदराबाद में हाफ मैराथन दौड़ में भाग लिया

सबसे पहला दौड़ हैदराबाद में 20 अगस्त 2009 को हाफ मैराथन में शुरुआत किया था जो पहले दौर में 108 वां स्थान प्राप्त करने के बाद लगातार सफलता की सीढ़ी चढ़ते गये और पीछे मुड़कर नहीं देखा. आर्थिक रूप से काफी पिछड़े होने के बाद भी धावक युवक अरुण ने अपने गरीबी की चिंता किये बिना अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमेशा तत्पर रहा है, वह कभी हार नहीं मानी.

अरुण का सपना है कि वह भारत के लिए मैराथन में दौड़ लगाकर स्वर्ण पदक जीते, जिसके लिए वह प्रतिदिन सुबह में मेहनत कर रहा है उसके बाद वह एक साईकिल दुकान में अपने रोजी-रोटी के लिए साइकिल का पंक्चर आदि बनाने का काम करता है. अपनी सफलता में मदद के लिए धावक अरुण ने कई बार राज्य सरकार से मदद की गुहार लगा चुका है पर कुछ हासिल नहीं हुआ.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >