चुनाव में तो यहां की जनता विकास की उम्मीदें और विकास में चार चांद लगने की आशा के साथ अपने प्रतिनिधि का चुनाव किया था, परंतु परिणाम ठीक विपरीत नजर आ रहा है. ऊंची दुकान फीकी पकवान वाली कहावत लागू होती नजर आ रही है. इस क्षेत्र में एक नहीं अनेक समस्याएं आज भी विद्यमान हैं. इसका हल निकालने की दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है.
बिदुपुर : मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं! यह कहावत बिदुपुर प्रखंड में लागू होती प्रतीत हो रही है. क्षेत्र में विकास कार्य का स्थिति काफी मंद दिख रही है. चुनाव में तो यहां की जनता विकास की उम्मीदें और विकास में चार चांद लगने की आशा के साथ अपना प्रतिनिधि का चुनाव किया था, परंतु परिणाम ठीक विपरीत नजर आ रहा है. ऊंची दुकान, फीकी पकवान वाली कहावत लागू होती नजर आ रही है. इस क्षेत्र में एक नहीं अनेक समस्याएं आज भी विद्यमान हैं.
नहीं हुई नहरों की उड़ाही : प्रखंड के दाउदनगर नहर, मनियारपुर नहर एवं गंगटा नहर को अतिक्रमण मुक्त करा कर आज तक उड़ाही नहीं करायी जा सकी. गंगा नदी किनारे पक्का बांध, सड़क एवं घाट का निर्माण नहीं कराया गया.
बिदुपुर गणिनाथ घाट स्थित मुक्तिधाम केंद्र में जेनेरेटर की व्यवस्था नहीं होने के कारण शव का दफन बाधित है. बिदुपुर बाजार-स्टेशन, राजापाकर, बेलकुंडा, सराय पथ को पीडब्ल्यूडी में उत्क्रमित कर चौड़ीकरण नहीं किया गया. उच्च विद्यालयों में प्लस टू की पढ़ाई के लिए भवनों का निर्माण एवं उपस्कर की व्यवस्था नहीं की गयी. चकसिकंदर स्थित कृषि फार्म की भूमि में कृषि महाविद्यालय या वेटनरी कॉलेज की स्थापना, चकसिकंदर एवं देवा चौक के बीच नाइपर के लिए चिह्नित 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर नाइपर को नही दिया गया.
नहीं सुधरी अस्पताल की व्यवस्था: आर्सेनिक युक्त पेयजल से मुक्ति के लिए बहुआयामी भूतल सतही योजना का शुभारंभ हुआ, परंतु आज तक धरातल पर नहीं उतरी. बिदुपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 50 बेडों में उत्क्रमित नहीं किया गया और न ही रेफरल अस्पताल का निर्माण बिदुपुर में हो सका.
स्नातकस्तरीय महाविद्यालय का निर्माण भी नहीं हो सका. प्रखंड के सभी राजस्व ग्रामों में स्टेट ट्यूबवेल की व्यवस्था नहीं की गयी और न ही बंद ट्यूबवेल को चालू कराया गया. ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिपूर्ण चेचर ग्राम समूह में डेढ़-दो वर्षों से खुदाई कार्य ठप है. नवनिर्मित संग्रहालय भवन का उद्घाटन भी नहीं किया गया. प्रखंड में स्टेडियम का निर्माण के लिए भी कोई पहल नहीं करायी गयी. विद्युत की जर्जर स्थिति कायम है और 33 केवीए जर्जर विद्युत तार को भी नहीं बदला गया.
महत्वपूर्ण सड़कें रह गयीं बदहाल :
स्थानीय देवा चौक से बालाटांड़, महेश्वरपुर-राजापाकर-महुआ जानेवाले पथ को पीडब्लूडी में उत्क्रमित कर चौड़ीकरण कराने की आवश्यकता महसूस की जा रही है. वहीं प्रखंड की दर्जनों ग्रामीण सड़कों की स्थिति जर्जर हो चुकी है.
माइल घाट से माइल बाजार होते हुए ऊंचे डीह पथ, बिदुपुर बाजार, गणिनाथ घाट एवं कटहरिया घाट पथ, बिदुपुर बाजार-मझौली पथ, कंचनपुर चौक से कंचनपुर घाट पथ, खालसा चौक से, खालसा घाट पथ, खालसा चौक से खानपुर पकड़ी पथ, कथौलिया मनियारपुर पथ, मायाराम हाट से चांदपुरा, खपूरा पथ, मायाराम हाट से चकसिकंदर पथ, चकसिकंदर से फुलपुरा पथ आदि की स्थिति काफी जर्जर है. साथ ही अतिथि कार्यालय के लिए नये भवनों की जरूरत महसूस की जा रही है. स्थानीय विधायक सह उपमुख्यमंत्री से लोगों की काफी उम्मीदें हैं.
