''ठंडा'' का ''फंडा'' हो सकता है नुकसानदेह!

सावधान. गरमी के मौसम में शीतल पेय के नाम पर उपलब्ध ठंडा बिगाड़ सकता है सेहत गरमी के इस मौसम में लोग शरीर को ठंडक प्रदान करनेवाले खाद्य और पेय पदार्थों को पसंद करने लगे हैं. मांग के अनुरूप बाजार में इनकी उपलब्धता भी है. मौसम का पारा बढ़ने के साथ ही बाजार में शीतल […]

सावधान. गरमी के मौसम में शीतल पेय के नाम पर उपलब्ध ठंडा बिगाड़ सकता है सेहत

गरमी के इस मौसम में लोग शरीर को ठंडक प्रदान करनेवाले खाद्य और पेय पदार्थों को पसंद करने लगे हैं. मांग के अनुरूप बाजार में इनकी उपलब्धता भी है. मौसम का पारा बढ़ने के साथ ही बाजार में शीतल पेय पदार्थों की मांग बढ़ी तब इसमें नकली, मिलावटी और केमिकलयुक्त पेय का धंधा चल पड़ा है. इससे लोगों के सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
हाजीपुर : गरमी के मौसम ने ठंडा पेय पदार्थ का बाजार भी गरम कर दिया है. शहर में इन दिनों गन्ने का रस, फलों के जूस, बेल की शरबत, लस्सी, नारियल पानी आदि की बिक्री खूब हो रही है. ककड़ी, खीरा और तरबूज भी लोगों को भा रहे हैं. भूख-प्यास महसूस होने पर ज्यादातर लोग इन्हीं चीजों को पसंद कर रहे हैं. बच्चे से बूढ़े तक बड़े चाव से इसका सेवन कर रहे हैं. महिलाएं भी इसे खूब पसंद कर रही हैं. शहर के राजेंद्र चौक, गांधी चौक, स्टेशन रोड, रामाशीष चौक सहित सभी प्रमुख स्थानों पर आजकल इन्हीं चीजों के स्टॉल सजे दिख रहे हैं, जहां लोगों की लाइन लगी रहती है.
मौसम के हिसाब से दुकानदारों ने बदला ट्रेड : नगर के अधिकतर फुटपाथ दुकानदारों ने अपना पेशा बदल कर बेल की शरबत, डाब, शिकंजी, कोल्ड ड्रिंक्स आदि की दुकानें सजा ली हैं. बाकी दिनों में चाय-नाश्ता, लिट्टी-चोखा, इमरती, भुंजा आदि बेचनेवाले इन दुकानदारों का कहना है कि गरमी के इस मौसम में लोगों की पसंद और मांग को देखते हुए अपना व्यवसाय बदल लिया है. ये दुकानदार कहते हैं कि गरमी में इन्हीं चीजों की बिक्री ज्यादा होती है. कमाई भी अच्छी हो जाती है. मौसम और मांग के लिहाज से अपना ट्रेड नहीं बदलेंगे, तो भूखे मर जायेंगे.
धड़ल्ले से बिक रहे केमिकलयुक्त व मिलावटी शीतल पेय : गरमी से राहत और गले को तर करने के नाम पर धड़ल्ले से बिक रहे शीतल पेय में मिलावट का खेल चल रहा है. इससे ग्राहकों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है. धोखाधड़ी के खेल से अनभिज्ञ ग्राहक हर दिन ठगे जा रहे हैं. कारोबारियों के लिए गरमी के दिनों में शीतल पेय की बिक्री बड़े मुनाफे का धंधा है. जानकारों का कहना है कि नामी कंपनियों के लेबल में नकली शीतल पेय बाजार में धड़ल्ले से बेचे जाते हैं.
कई बार धंधेबाजों का हो चुका है भंडाफोड़ : सदर थाना क्षेत्र में ही कई बार छापेमारी के दौरान नकली शीतल पेय की फैक्टरियों का भंडाफोड़ भी हो चुका है. इसके बाद भी सेहत को नुकसान पहुंचानेवाले पेय पदार्थों की बिक्री जारी है. बताया जाता है कि मानक के विपरीत इसमें प्रयोग किये जानेवाले केमिकल लोगों के लीवर पर सीधे प्रभाव डालते हैं. साथ ही पेट संबंधित कई बीमारियों के लोग शिकार हो जाते हैं. ग्राहकों की शिकायत है कि इस पर नजर रखने के लिए अधिकृत संबंधित विभाग के अधिकारी भी आंखें मूंदे रहते हैं. इसके चलते अनियमितता में अधिकारियों की संलिप्तता के भी आरोप लग रहे हैं.
मिलावटी और केमिकलयुक्त शीतल पेय के माध्यम से धंधेबाज कर रहे कमाई
देशी व प्राकृतिक पेय पदार्थ हैं ज्यादा बेहतर
शहर के दर्जनों लोगों से गरमी में उनके पसंदीदा पेय पदार्थ के बारे में पूछे जाने पर अधिकतर लोगों ने बाजार में बिकनेवाले लोकप्रिय कोल्ड ड्रिंक्स के बदले डाब, लस्सी, गन्ने के रस आदि को अपना मनपसंद पेय बताया. हथसारगंज निवासी सुधीर कुमार, बागदुल्हन निवासी प्रमोद कुमार, चौहट्टा के बीएन राय, प्रेम प्रकाश आदि कहते हैं कि केमिकल युक्त कोल्ड ड्रिंक्स की जगह फलों के जूस और बेल की शरबत, लस्सी आदि पेय श्रेष्ठ विकल्प है. लोगों का कहना है कि बाजार में बिक रहे कई कोल्ड ड्रिंक्स स्वास्थ्य पर भी हानिकारक प्रभाव डालते हैं. इनसे हड्डियां भी कमजोर होती हैं. वहीं, फलों के जूस, डाब जैसे देसी प्राकृतिक पेय पदार्थ सेहत के लिए फायदेमंद तो हैं ही, गरमी और धूप का असर कम करने में भी सहायक साबित होते हैं.
क्या कहते हैं चिकित्सक
कोल्ड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन ऐसे भी शरीर के लिए नुकसानदेह है. यह हड्डियां को कमजोर करता है. मिलावटी और नकली शीतल पेय तो अत्यंत घातक हैं. इससे न सिर्फ टिशु क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि लीवर, लंग्स समेत शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
डॉ अनिल कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी, सदर अस्पताल

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