कड़ी धूप में खड़े रहते हैं लोग

इस भीषण गरमी में सड़क किनारे खड़े होकर देह जलानेवाली धूप का सामना करते हुए बेहाल यात्रियों को किसी भी वाहन पड़ाव पर देखा जा सकता है. राजधानी से सटा यह शहर उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि-स्थल है. हर रोज हजारों यात्री यहां से अपने गंतव्य को जाने के लिए वाहन पकड़ते हैं. […]

इस भीषण गरमी में सड़क किनारे खड़े होकर देह जलानेवाली धूप का सामना करते हुए बेहाल यात्रियों को किसी भी वाहन पड़ाव पर देखा जा सकता है. राजधानी से सटा यह शहर उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि-स्थल है. हर रोज हजारों यात्री यहां से अपने गंतव्य को जाने के लिए वाहन पकड़ते हैं. नगर क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन वाहन पड़ाव हैं, जिनमें कई ऑटो स्टैंड शामिल हैं. इनमें किसी भी वाहन पड़ाव पर यात्रियों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है.

हाजीपुर : विकास की यात्रा में हाजीपुर शहर चाहे जिस मुकाम पर पहुंच गया हो, यात्रियों की सुविधा के मामले में यह शहर आज भी पिछड़ा है. परिवहन निगम का बस पड़ाव हो या निजी वाहन स्टैंड, कहीं भी न यात्री शेड, न पेयजल और न ही शौचालय की सुविधा. गरमी हो या बरसात, खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े होकर यहां वाहन का इंतजार करना यात्रियों की नियति बन गयी है. नगर क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन वाहन पड़ाव हैं. इनमें किसी भी वाहन पड़ाव पर यात्रियों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है. लिहाजा, यात्रियों को हर मौसम की मार झेलनी पड़ रही है.
सड़क पर खड़े होकर करते हैं वाहन की प्रतीक्षा : नगर के रामअशीष चौक पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम का बस पड़ाव है. यहां से यात्री उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, शिवहर, मोतिहारी, दरभंगा, समस्तीपुर समेत अन्य जिलों के लिए बस पकड़ते हैं. निगम का यह बस पड़ाव आवारा पशुओं का आरामगाह बनता जा रहा है.
यहां यात्रियों के लिए कोई भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है. मजबूरन यात्रियों को वाहन के इंतजार में सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ता है. हालांकि दशकों पहले रेलवे स्टेशन के समीप कभी परिवहन निगम का डिपो हुआ करता था. उस बस डिपो में यात्री शेड, बैठने की सुविधा से लेकर अन्य प्रकार की सहूलियतें उपलब्ध थीं. डिपो बंद होने के बाद अब हाल यह है कि बस पड़ाव तो है, लेकिन बस की प्रतीक्षा करने के लिए यात्रियों के बैठने का भी इंतजाम नहीं है.
निजी वाहन पड़ाव में भी कोई सुविधा नहीं : नगर के रामअशीष चौक को उत्तर बिहार का प्रवेश द्वार कहा जाता है. यहां से विभिन्न दिशाओं के लिए रोजाना सैकड़ों वाहन खुलते हैं. चौक के पूरब और उत्तर निजी वाहनों के स्टैंड हैं. दिन भर यहां वाहनों की कतार और यात्रियों की भीड़ लगी रहती है. अहले सुबह से लेकर देर शाम तक हर पांच-10 मिनट पर यहां से गाड़ियां खुलती रहती हैं. यहां से रांची, टाटा, बोकारो और उत्तर दिशा की ओर पूर्णिया, मधुबनी, चंपारण, रक्सौल समेत अन्य स्थानों के लिए लंबी दूरी की प्राइवेट बसें खुलती हैं. इसके अलावा रामअशीष चौक स्टैंड से ही महुआ, महनार, जंदाहा, पातेपुर, ताजपुर समेत अन्य दर्जनों जगहों के लिए बस और मिनी बसें चलायी जाती हैं. इसी स्टैंड से हाजीपुर-पटना रिंग सर्विस की बसें खुलती हैं. यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद यहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं. एक शेड तक नहीं.
पेयजल की समस्या से भी जूझने को मजबूर हैं यात्री
महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी
नगर के किसी भी वाहन पड़ाव पर यात्रियों की सुविधा का इंतजाम नहीं होने से महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी है. महिलाओं के लिए सबसे बड़ी आफत शौचालय या यूरिनल की व्यवस्था नहीं होने के कारण है. शेड के अभाव में महिला यात्रियों को गरमी में धूप से तप कर और बारिश के दिनों में पानी में भीग कर वाहन की प्रतीक्षा करनी पड़ती हैं. पेयजल का साधन नहीं होने के चलते इनके लिए प्यास बुझाना मुश्किल होता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >