आफत. भीषण गरमी से हर तबका हुआ परेशान, नहीं मिल रही कोई राहत, घर से निकलना हुआ मुश्किल
पारा चढ़ कर 43.3 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा
देह को जलाती धूप और गरम हवा के झोकों के बीच बुजुर्ग क्या जवान भी पस्त होने लगे हैं. सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे हो रहे हैं. भरी दोपहर में स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चे जब घर लौटते हैं, तो धूप और गरमी से बेदम हो चुके होते हैं. शहर के विभिन्न मार्गों पर स्कूली वाहनों के जाम में फंसने के कारण बच्चे और बेहाल हो जाते हैं. दिन चढ़ते ही बदन झुलसा देने वाली धूप से बच्चे से बूढ़े तक सभी बेहाल होने लगे हैं.
हाजीपुर : वैशाख का महीना शुरू ही हुआ है, लेकिन इसकी धमक लोगों को एहसास दिला रही है कि वे जेठ में किस तरह तपेंगे. वैशाख का पहला दिन इस मौसम का सबसे गरम दिन साबित हुआ, जब पारा चढ़ कर 43.3 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा. तेजी से बढ़ती गरमी ने जिले के लोगों को बेचैन कर दिया है. मौसम के तीखे तेवर से पस्त हुए लोगों की जुबान पर एक ही बात कि उफ! कैसे कटेगी यह गरमी.
तीखी धूप से बच्चे, बूढ़े, सब बेहाल : दिन चढ़ते ही बदन झुलसा देनेवाली धूप से बच्चे से बूढ़े तक सभी बेहाल होने लगे हैं. धाह देती धूप और गरम हवा के झोंकों के बीच बुजुर्ग क्या जवान भी पस्त होने लगे हैं. सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे हो रहे हैं. भरी दोपहर में स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चे जब घर लौटते हैं, तो धूप और गरमी से बेदम हो चुके होते हैं. शहर के विभिन्न मार्गों पर स्कूली वाहनों के जाम में फंसने के कारण बच्चे और बेहाल हो जाते हैं.
धूप की तपिश ऐसी कि सयाने भी इसका सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे. फुटपाथ दुकानदारों, वेंडरों, रिक्शा-ठेला चालकों और कामकाजी लोगों पर तो जैसे शामत ही आ गयी है.
घरों में ही दिन गुजार रहे लोग : मौसम का मिजाज देख अधिक तर लोग अब दिन में घरों में बंद रहना ही मुनासिब समझ रहे हैं. आवश्यक काम होने पर लोग निकल भी रहे हैं, तो धूप से बचने के लिए सिर पर टोपी या गमछा रख कर और चेहरे को ढक कर ही. अमूमन आंखों पर धूप का चश्मा भी बढ़ चुका है. तापमान में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है, उसे देख कर लोग सहम गये हैं. लोगों का कहना है कि वैशाख के महीने में जब यह हाल हैं, तो जेठ महीने में तो धरती आग उगलेगी.
गन्ने का रस, फलों के जूस और शीतल पेयजल की बढ़ी मांग : एक तो शादी-विवाह का मौसम, ऊपर से पंचायत चुनाव की सरगरमी. ऐसे में स्वाभाविक रूप से शहर-बाजार में चहल-पहल बढ़ी हुई है. पसीने से तर-ब-तर लोग कुछ कदम चलते ही छाया की तलाश करने लगते हैं. प्यास लगने पर पानी की तलाश में लोगों को भटकना पड़ रहा है. हलक सूखने पर कोल्ड ड्रिंक्स और जूस आदि की दुकानों का रुख करते हुए लोग दिख रहे हैं. लिहाजा, फलों के जूस, गन्ने के रस, लस्सी और कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री बढ़ गयी है.
प्यास बुझाने के लिए पानी भी मिलना मुश्किल : शहर में पेयजल के लिए पर्याप्त संख्या में वाटर सप्लाइ का नल या चापाकल नहीं होने के कारण प्यास लगने पर बोतलबंद पानी खरीद कर पीना लोगों की मजबूरी है. चाय-नाश्ते की दुकानों पर प्यास बुझाने के लिए पानी तो नहीं मिलती, दुकानदार की झिड़कियां जरूर मिल रही हैं. दुकानदार अपनी परेशानी बताते हैं. दुकानदारों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से पानी भरना पड़ता है. सारा पानी लोगों की प्यास बुझाने में ही खर्च कर दें, तो ग्राहक को क्या पिलायेंगे. कोर्ट, कचहरी एवं सरकारी दफ्तरों में अपने काम से आनेवाले हजारों लोगों को न पीने के लिए पानी मिल पा रहा और न ऐसी जगह, जहां वे कुछ देर रुक कर सुकून पा सके.
बेबस हुए किसान, दम तोड़ रहे पशु-पक्षी : गांवों के मैदानी इलाकों में चल रहे हीट वेव से किसान भी सहम गये हैं. वे खेतों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. बढ़े तापमान के बीच खेतों में लगी हरी सब्जियों एवं अन्य फसलों को जलने और मुरझाने से बचाना किसानों की सबसे बड़ी चुनौती है. लेकिन सुबह से ही धूप इतनी तीखी हो जा रही है कि दिन में खुले आसमान के नीचे किसानों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है. गांव के आहर, पोखर, तालाब,, नहर आदि के सूख जाने से मवेशियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है. प्यास से तड़पते पशु-पक्षी भी गरमी की मार झेल रहे हैं. कई स्थानों पर पशु-पक्षियों को पानी के बिना दम तोड़ते देखा जा रहा है.
राजेंद्र चौक पर खुला प्याऊ : हाजीपुर. गरमी में लोगों को पानी पिलाने के लिए शहर के राजेंद्र चौक पर हल्ला बोल संगठन द्वारा प्याऊ की व्यवस्था की गयी है. संगठन के अध्यक्ष निशांत गांधी ने सोमवार को इसका उद्घाटन किया. मौके पर संजीव कुमार, दिनेश सिंह, मीना देवी, कृष्णा प्रसाद सिंह आदि उपस्थित थे. संगठन ने अन्य व्यापारिक, सामाजिक संगठनों से भी शहर में प्याऊ खोलने की अपील की.
