वैशाली महोत्सव. कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने बांधा समां, हर कलाकार छोड़ रहा है अपनी छाप
वैशाली महोत्सव के दूसरे दिन हुए कई कार्यक्रम
लोगों ने कार्यक्रमों का उठाया आनंद
वैशाली गढ़ : भगवान महावीर की जन्मभूमि, बुद्ध की कर्मभूमि, राजनर्तकी आम्रपाली की रंगभूमि और विश्व में प्रथम गणतंत्र को उद्घोषित करने वाली वैशाली में आयोजित वैशाली महोत्सव में संगीत की छटा से प्रकाशित हो रही है. शास्त्रीय एवं प्रदेश के पारंपरिक गीत व नृत्य से दर्शक मुग्ध हैं. महोत्सव के दूसरे दिन राजस्थानी गरबा, कालबेलिया एवं धुमर की पारंपरिक नृत्य के साथ स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि लोग झूम उठे. महिला महोत्सव, बेबी शो एवं परंपरागत खेल-कूद के आयोजन ने महोत्सव में चार चांद लगा दिया. महोत्सव में उमड़ रही भीड़ ने इस खूब आनंद उठाया.
शास्त्रीय संगीत के नाम रही महोत्सव की शाम : महोत्सव के प्रथम दिन अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बांसुरी की ऐसी तान छेड़ी कि लोग मुग्ध हो उठे. पंडित चौरसिया ने राग बिहाग में विलंबित, मध्य एवं द्रुत में ख्याल की प्रस्तुति कर भारतीय शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रंगों से परिचित कराया.
दर्शक भी केवल उन्हें सुनना चाह रहे थे. पद्म श्री देवयानी ने भारत नाट्यम की प्रस्तुति कर आम्रपॉली की की याद को जीवंत कर दिया. उन्हें सुनने एवं देखने के लिए दर्शकों की भीड़ थी. कुछ संगीत के विद्यार्थी दूर से ही उन्हें नमन किया. पटना से पहुंचे बांसुरी बादक मिथिलेश सिंह ने कहा कि पहली बार पंडित जी वैशाली की धरती पर पधारे हैं, जो गर्व की बात है. ऐसी वैशाली की महत्ता है.
देशभक्ति गीत-नृत्य की प्रस्तुति देख हुए अचंभित : अोड़िशा से पहुंचे प्रिंस डांस ग्रुप ने सारे जहां से अच्छा गीत की ऐसी शानदार प्रस्तुति की कि लोग झूम उठे. 15 कलाकारों के दल ने प्रस्तुति के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के साथ अनेक प्रकार के रंग भरे. डांस ग्रुप के अर्जुन साह के नेतृत्व में संतोष, दीपक, अजय, भोलानाथ, संतोष, कंगारू, मंगला, नारायण, सुमित, मानव, मेधा आदि ने प्रस्तुति को यादगार बना दिया. हरा, सफेद, और केसरिया रंग में रंगे कलाकारों ने आकर्षक और शानदार प्रस्तुति दी.
ग्रामीण संस्कृति की खुशबू से मुग्ध हुए दर्शक : स्थानीय मछुआरों ने चैता गीत की प्रस्तुति कर ग्रामीण और भारतीय संस्कृति की ऐसी छटा विखेरी की दर्शक झूम उठे. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में उमेश सहनी, गजेंद्र, चंदेश्वर सहनी, जालंधर सहनी, बोद्धा सहनी, राजमंगल सहनी, वृक्ष सहनी आदिन े एक से बढकर एक चैता गीत की प्रस्तुति की. ग्रामीण संस्कृति की खुशबू से महोत्सव सुगंधित हो उठा. राजा जनक जी कठिन यज्ञ ताने, हो रामा, माथुर साहेब जगाय वैशाली नगरिया हो रामा की प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया.
महिला महोत्सव एवं बेबी शो ने किया आकर्षित : महोत्सव के दूसरे दिन महिला एवं बेबी शो का आयोजन किया गया. महिला महोत्सव में जहां नारी सशक्तीकरण का दीदार कराया, वहीं बेबी शो में बच्चों ने धमाल मचाया. इससे संबंधित सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी गयी. बेटी पढ़ाओ की जानकारी भी दी गयी. बेटी पढ़ाओ बेटी बचाव की झलक भी प्रस्तुत की गयी. बेटी की महत्ता लोगों को बतायी गयी. बेबी शो का उद्देश्य था कि बेटों की तरह ही बेटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
फूड फेयर में उठाया लजीज व्यंजनों का लुत्फ : वैशाली महोत्सव मेले में आयोजित फूड फेयर में मेला में आये लोगों ने लजीज व्यंजनों का भरपूर आनंद उठाया. बिहारी भोजन लिट्टी चोखा से लेकर चाइनीज फूड तक का लोगों ने लुत्फ लिया. इमरती और ग्रामीण व्यंजनों ने लोगों को भी आकर्षित किया. पानीपुरी, जलेबी, विभिन्न प्रकार के मिठाई, छोला-भट्रा के अलावे भोजन का रसास्वदन किया.
पदर्शनियों से ली जानकारी : मेला में लगायी गयी सरकारी एवं गैर सरकारी प्रदर्शनियों की लोग जानकारी लेने में जुटे रहे. कृषि प्रदर्शनी में आधुनिक कृषि संयंत्रों की लोगों ने जानकारी प्राप्त की़ वहीं, बिहार शिक्षा परियोजना के प्रदर्शनी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं के बारे में बताया गया. स्वास्थ शिविर एवं विभागिय स्वास्थ शिविर में नशामुक्त बिहार का संदेश दिया गया व सीएम द्वारा चलायी गयी मुहिम में शामिल होने की अपील की गयी. इसके अलावा बागबानी मिशन, डीआर डीए आदि के अन्य प्रदर्शनियों में भी लोगों की भीड़ बनी रही.
पर्यटन स्थलों का किया भ्रमण और ली सेल्फी : मेला में पहुंचे लोग सुबह से ही पर्यटक स्थलों का भ्रमण और दर्शन किया. इस दौरान जैन मंदिर, बौध मंदिर, बौध स्तुप नया एवं पुराना, राजा विशाल का गढ़, म्यूजियम, जापानी मंदिर, बासोकुंड अशोक स्तंभ आदि स्थलों का देखा. इस दौरान लोगों ने खूब सेल्फी ली. युवा और बच्चे खासा उत्साहित
दिखे. सेल्फी लेनेवालों की धूम
मची रही. सभी एेतिहासिक स्थलों को कैमरे में बंद कर यादगार के रूप में रखा. मेले में प्रेमी युगलों ने भी खूब लुत्फ उठाया.
