छोटे-मोटे काम के लिए भी सप्ताह भर दौड़ना पड़ता है
इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमों के तेजी से बनी मजबूत पकड़ ने जहां डाक माध्यम को फीका बना दिया है, वहीं विभाग ने भी अब इस ओर ध्यान देना बंद ही कर दिया है.
इसी का खामियाजा भुगत रहा है अनिरुद्ध बेलसर का उपडाकघर. यहां अन्य तरह की कई समस्याएं तो हैं ही, कर्मियों की घोर कमी से काम बाधित हो रहा है.
पटेढ़ी बेलसर : प्रखंड के अनिरुद्ध बेलसर उपडाकघर कर्मियों की कमी का रोना रो रहा है. मात्र एक कर्मी के सहारे संचालित हो रहा है यह उप डाकघर. ग्राहकों की सुविधा का ख्याल रखने का भारतीय डाक विभाग का दावा खोखला साबित हो रहा है. छोटे-मोटे कामों के लिए भी सप्ताह भर तक दौड़ना पड़ता है.
किराये के मकान के एक छोटे से कमरे में संचालित इस उपडाकघर का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. इसके एक भाग का छप्पर धराशायी हो चुका है. कर्मी एवं ग्राहकों के लिए कोई सुविधा नहीं है.
सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है : इस उपडाकघर में प्रतिदिन लाखों रुपये की जमा-निकासी होती है, परंतु सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है. इसके अंतर्गत 10 डाकघर संचालित है.
पूर्व में इस उपडाकघर में चोरी का भी प्रयास किया जा चुका है. इसमें कहने के लिए तो दो कंप्यूटर हैं, लेकिन काम सिर्फ एक पर ही होता है. एक दो माह से खराब है. ग्राहकों को बराबर लिंक फेल रहने की शिकायत पर घंटो लाइन में लगना पड़ता है. खाता अपडेट कराने के लिए भी पूरा दिन लगता है. सबसे ज्यादा परेशानी समय उपरांत किसान विकास पत्र की राशि निकासी में होती है. इसके लिए ग्राहकों को लंबे समय तक दौड़ाया जाता है.
