पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
औद्योगिक क्षेत्र में 18 कल-कारखाने हो चुके हैं बंद
हाजीपुर : दशकों पहले हाजीपुर को औद्योगिक नगर बनाने का सपना दिखाया गया था. जब यहां कल-कारखाने लगने शुरू हुए, तो रोजगार के अवसर भी बढ़े, विकास की संभावनाएं परवान चढ़ीं. खुशहाली और समृद्धि की उम्मीदें बढ़ीं. क्षेत्र के बेरोजगार नौजवानों का हौसला बढ़ा. एक के बाद एक फैक्टरियां खुलनी शुरू हुईं.
बेरोजगार हाथों को काम भी मिलने लगे. बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार के अंतर्गत हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में लगभग सौ कल-कारखाने स्थापित हुए. इनमें हजारों कामगारों को रोजी-रोटी मिली. कालांतर में, जब यहां एक के बाद एक फैक्टरियां बंद होने लगीं तो इनमें काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी छिनती चली गयी. फिर से बेरोजगार हुए इन कामगारों के लिए वह सुनहरा सपना आज दु:स्वप्न में बदल चुका है.
निर्माणाधीन फैक्टरियों ने जगायी नयी उम्मीद : हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में डेढ़ दर्जन कारखानों के बंद हो जाने के बावजूद नगर में औद्योगिक विकास की आस टूटी नहीं है.
सुकून की बात है कि यहां 73 औद्योगिक इकाइयां अभी भी चल रही हैं. इनमें कार्यरत मजदूर हर दिन यह दुआ करते हैं कि कारखाने की मशीनें इसी तरह हमेशा खट-खट करती रहें, ताकि इनकी रोजी-रोटी सलामत रहे. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र में 15 कल-कारखाने निर्माणाधीन हैं. लगभग 11 करोड़ की लागत से खोली जा रही विभिन्न फैक्टरियों में लगभग पांच हजार लोगों के रोजगार मिलने की उम्मीद है. इन फैक्टरियों में प्लास्टिक गुड्स, आटा-सूजी-मैदा, मिनरल वाटर, आयुर्वेदिक दवा, मशाले, पुनी प्लांट, सीड्स आदि के उत्पादन होने हैं.
