बरखास्त सिपाही बृजनाथी कई मामलों में था आरोपित
हाजीपुर/बिदुपुर : राघोपुर प्रखंड की फतेहपुर पंचायत के पूर्व मुखिया और प्रखंड प्रमुख मुन्नी देवी के भैंसुर बृजनाथी सिंह की हत्या अज्ञात अपराधियों ने गोली मार कर तब कर दी थी, जब वे राघोपुर से अपने परिजनों के साथ पटना जा रहे थे. पटना के कच्ची दरगाह के निकट उनकी हत्या एके 47 से गोली मार कर कर दी गयी. बृजनाथी सिंह बिहार पुलिस के बरखास्त सिपाही थे और हत्या के कई मामलों के नामजद अभियुक्त थे.
क्या है घटना
दिन के लगभग तीन बजे अपनी स्कॉर्पियो से वे पटना जा रहे थे कि पटना कच्ची दरगाह पीपा पुल के निकट अपराधियों ने ताबतोड़ गोली चला कर हत्या कर दी. उस समय उनके साथ उनकी पत्नी वीरा देवी, आंगनबाड़ी सेविका भाभो पूजा देवी, भतीजा गोलू कुमार उर्फ राज रोशन एवं वाहन चालक गाड़ी में सवार थे.
पूजा देवी को पेट एवं जांघ में गोली लगी है और चिंताजनक स्थिति में अस्पताल में भरती कराया गया है. भतीजा गोलू कुमार को गोली से केवल खरोच आयी है.वर्ष 1990 में बिहार पुलिस से बरखास्तगी के बाद बृजनाथी बाहुबली बृजनाथी के रूप में चर्चित हुए और उसके बाद एक-एक कर कई आपराधिक मामले उनके विरुद्ध दर्ज हुए. अपराध के क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहलकदमी बढ़ायी और पंचायतीराज व्यवस्था के कई पदों पर अपने परिवार के सदस्यों को काबिज कराया.
बृजनाथी सिंह पर बाजितपुर गांव के डीलर की हत्या करने का आरोप है. चुनावी रंजिश के कारण गाड़ी से खींच कर नयागांव के निकट डीलर की हत्या कर दी गयी थी. इसके साथ ही वर्ष 1998 में खजुवत्ती गांव निवासी शिक्षक सहदेव राय की हत्या, चकौसन पेट्रोल पंप पर रंगदारी की मांग को लेकर गोलीबारी, फतेहपुर गांव निवासी अनील सिंह पर गोलीबारी, राघोपुर के बीडीओ को जान मारने की धमकी, गत विधानसभा चुनाव में शिवसेना प्रत्याशी रहे अनील सिंह के साथ गोखुलपुर में मारपीट करने के आरोप में उनके विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज है.
इसके अलावा राघोपुर और रुस्तमपुर थाने में उनके विरुद्ध दर्जनाधिक मामले दर्ज हैं. बिहार पुलिस के सिपाही रहे बृजनाथी सिंह को बिहार सरकार ने तब बरखास्त कर दिया था, जब उन्होंने अपने सेवाकाल में ही एक सिपाही की हत्या कर दी थी.सेवा से बरखास्तगी के बाद राघोपुर की राजनीति में अपनी दखल बढ़ायी.
विधानसभा पहुंचने का सपना नहीं हुआ पूरा
पंचायतीराज व्यवस्था में अपनी पैठ बनाने के बाद उन्होंने विधानसभा तक अपनी पहुंच बनाने के लिए वर्ष 1995 के चुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमायी, लेकिन हार का समाना करना पड़ा. वर्ष 1998 में संपन्न विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी वीरा देवी को मैदान में उतारा, लेकिन सफलता नहीं मिली. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से अपनी पत्नी वीरा देवी को प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा था, लेकिन फिर हार का सामना करना पड़ा.
पुत्र राकेश रोशन ने लड़ा था विस चुनाव
बृजनाथी सिंह लंबे समय से लोजपा की राजनीति में सक्रिय थे और राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट के प्रमुख दावेदार थे, लेकिन गंठबंधन में यह सीट भाजपा के कोटे में चले जाने के कारण उन्हें निराशा हाथ लगी और अंतत: समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में इन्होंने अपने पुत्र राकेश रोशन को उतारा था. लेकिन राकेश रोशन को काफी कम मत मिले.
भाभो थीं प्रखंड प्रमुख
वर्ष 2001 के पंचायती चुनाव में उन्होंने मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा और फतेहपुर पंचायत के मुखिया निर्वाचित किये गये. 2006 के चुनाव में उनके भाई अमरनाथ सिंह की पत्नी मुन्नी देवी पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित हुईं, लेकिन प्रखंड प्रमुख बनने का सपना पूरा नहीं हो सका. वर्ष 2008 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से तत्कालीन प्रमुख को हटा कर अपनी भाभो मुन्नी देवी को प्रमुख बनाने में सफल हो गये. फिर 2011 के चुनाव में मुन्नी देवी पंचायत समिति सदस्य चुनी गयीं और तबसे राघोपुर की प्रखंड प्रमुख हैं.
पैक्स अध्यक्ष हैं भाई
विधानसभा और पंचायती चुनाव में दावं लगाने के बाद उन्होंने पैक्स चुनाव में भी दावं लगाया और अपने भाई बद्री नारायण सिंह उर्फ लल्लु सिंह को पैक्स अध्यक्ष बनाया.
