सरकार की शराब बंदी को प्रभावी ढंग से लागू कराने को लेकर पहल
हाजीपुर : शराब बंदी को कामयाब बनाने में स्वास्थ्य विभाग की भी अहम भूमिका होगी. जिले के सदर अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड स्थापित किया जायेगा. राज्य सरकार की मद्य निषेद्य नीति को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड बनाने का निर्णय लिया है. इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव के आदेश पर सदर अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड बनाने की कार्रवाई शुरू हो गयी है. सिविल सर्जन डाॅ इंद्रदेव रंजन ने बताया कि एक अप्रैल से अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड चालू हो जायेगा.
10 शय्या वाले वार्ड में 12 कर्मी होंगे तैनात : सदर अस्पताल के सर्जिकल एवं महिला वार्ड वाले भवन के दूसरे तल्ले पर कैदी वार्ड के बगल में 10 शय्या का नशा मुक्ति वार्ड स्थापित किया जायेगा. वार्ड को संचालित करने के लिए दो चिकित्सा पदाधिकारी, तीन स्टाफ नर्स, तीन कक्ष सेवक, एक लिपिक, दो परामर्शी के अलावा डाटा इंट्री ऑपरेटर एवं सुरक्षा प्रहरी की प्रतिनियुक्ति की गयी है. चिकित्सकों एवं कर्मियों का चयन कर लिया गया है.
मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा मार्च के दूसरे सप्ताह में इनकी प्रतिनियुक्ति का विधिवत आदेश जारी किया जायेगा. वार्ड के लिए चिह्नित किये गये भवन में आधारभूत संरचना एवं तमाम जरूरी संसाधन की व्यवस्था के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम को निर्देश दिया गया है. सिविल सर्जन ने बुधवार को वार्ड बनाये जाने वाले स्थल का निरीक्षण किया और डीपीएम को आवश्यक निर्देश दिये.
सौ से अधिक नर्सों की हुई पोस्टिंग : जिले में सदर अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक नर्सों के अभाव में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है. बड़ी संख्या में एएनएम के पद खाली रहने के कारण लोगों के इलाज एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लागू करने में बाधा पहुंच रही है. इस स्थिति में सुधार की संभावना बन गयी है. नर्सों की कमी दूर करने के लिए जिले में 110 एएनएम की पोस्टिंग हो चुकी है. 30 जनवरी को 33 एएनएम तथा इसके पहले 77 एएनएम की पोस्टिंग हुई. सभी पदस्थािपत एएनम को जिले के महनार, पातेपुर, देसरी, चेहराकलां, महुआ, राजपाकर, आदि क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र एवं उप केंद्रों पर लगाया गया है.
सरकारी अस्पताल में निजी डॉक्टर भी करेंगे नसबंदी : परिवार नियोजन को प्रभावी बनाने के लिए अब सदर अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट डॉक्टरों एवं एनजीओ के द्वारा भी ऑपरेशन किये जायेंगे. एसीएमओ डाॅ अमर नाथ झा ने बताया कि सरकार अस्पताल में प्राइवेट डॉक्टर या स्वयंसेवी संस्था की ओर से परिवार नियोजन ऑपरेशन किये जाने पर उन्हें सरकार द्वारा प्रति महिला बंध्याकरण पर 1380 रुपये तथा प्रति पुरुष नसबंदी पर 6880 रुपये का भुगतान किया जायेगा. इसके लिए उन्हें ऑपरेशन से संबंधित सारी व्यवस्था खुद से करनी होगी.
एनजीओ भी करा सकेंगे ऑपरेशन : प्राइवेट चिकित्सक या एनजीओ सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से ऑपरेशन का कार्य करेंगे, तो ऐसी स्थिति में उन्हें महिला बंध्याकरण के लिए 150 रुपये और पुरुष नसबंदी के लिए 200 रुपये का भुगतान किया जायेगा. एसीएमओ ने बताया कि मेंमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत दो साल के लिए यह योजना बनायी गयी है. इसके लिए इच्छुक निजी चिकित्सक या एनजीओ से पांच फरवरी तक आवेदन लिये जायेंगे. 28 फरवरी तक इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी और एक मार्च से बंध्याकरण या नसबंदी का कार्य शुरू हो जायेगा.
