हाजीपुर : बुधवार की शाम. सड़क पर पसरा सन्नाटा. अनहोनी की आशंका से डरे-सहमे लोग. वातावरण में तनाव तथा लोगों के चेहरे पर खौफ और खामोशी. सड़क पर जले वाहनों से उठ रहा धुआं. यह दृश्य नगर के बागमली मोहल्ले का है, जो मंगलवार की रात हुए उपद्रव की कहानी कह रहा था. 26 जनवरी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
हाजीपुर : बुधवार की शाम. सड़क पर पसरा सन्नाटा. अनहोनी की आशंका से डरे-सहमे लोग. वातावरण में तनाव तथा लोगों के चेहरे पर खौफ और खामोशी. सड़क पर जले वाहनों से उठ रहा धुआं. यह दृश्य नगर के बागमली मोहल्ले का है, जो मंगलवार की रात हुए उपद्रव की कहानी कह रहा था. 26 जनवरी को जब पूरा शहर गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा था,
जिला प्रशासन सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ हाइकोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए मशक्कत कर रहा था. दिन भर की मशक्कत के बाद जब रात हुई तो आखिरकार वही हुआ, जिसका अंदेशा सुबह से ही था. हाजीपुर-लालगंज मार्ग पर बागमली स्थित बासुदेव मंदिर को तोड़े जाने का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने मंगलवार की रात कानूनी कार्रवाई शुरू होते ही पुलिस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिये. उत्तेजित लोगों ने एक पुलिस वाहन और दो ट्रैक्टरों को फूंक दिया.
पुलिस प्रशासन की सूझबूझ और संयम से टला बड़ा बवाल : सड़क अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पटना उच्च न्यायालय ने उक्त स्थान से मंदिर हटाने का आदेश दिया था. इस आदेश को लागू करने में जिला प्रशासन को पिछले दिनों सफलता नहीं मिली थी. लोगों के विरोध के चलते उसे पीछे हटना पड़ा था.
हाइ कोर्ट ने इस पर सख्त रूख अपनाते हुए 27 जनवरी को सरकार से जवाब मांगा था. उधर, जिला प्रशासन पर 26 जनवरी तक इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने का दबाव था, तो इधर स्थानीय लोगों की जिद थी कि किसी कीमत पर मंदिर हटने नहीं देंगे. हालांकि इस बार पूरी तैयारी के बावजूद प्रशासन को मंदिर हटाने में तो सफलता नहीं मिली,
लेकिन पुलिस प्रशासन ने जिस संयम और सूझ-बूझ से काम लिया, उससे संभावित अनहोनी टल गयी. जिस प्रकार उत्तेजित भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया, यदि जवाबी कार्रवाई होती, तो रात के अंधेरे में कई जानें जा सकती थीं.
बुधवार से बुधवार तक आक्रोश, आग और धुआं : बुधवार को बागमली सड़क पर जो धुआं उठता दिख रहा था, उस आग की चिनगारी पिछले बुधवार को ही सुलग चुकी थी. तब लोगों के आक्रोश के सामने पुलिस बल को असहाय होकर लौटना पड़ा था.
पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी हाइ कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोगों को लाख समझाते-बुझाते रहे, लेकिन उत्तेजित लोगों ने उनकी एक न सुनी थी. मोहल्ले की महिलाएं और लड़के इस बात पर अड़ गये कि जान दे देंगे, लेकिन मंदिर नहीं टूटने देंगे. लोगों का आक्रोश देख प्रशासन ने उस समय तो अपने कदम पीछे खींच लिये, लेकिन मोहल्ले वालों का आक्रोश बढ़ता चला गया.
इस बीच मंदिर के नाम पर लोगों की भावनाएं भड़काने की कोशिश भी होती रही. पूरे घटना क्रम में एक बात साफ दिखी की मंदिर के बहाने उत्तेजना पैदा करने के प्रयास पर जागरूक समाज ने पानी फेर दिया. नगर के आम लोगों ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी. ज्यादातर लोगों ने इसे कानूनी मामला बताते हुए इसे तूल देना मुनासिब नहीं समझा.
26 जनवरी को जब पुलिस प्रशासन अपनी कार्रवाई में जुटा था, शहर में दिन भर इस मामले पर चर्चा होती रही. अधिकतर लोगों ने कानून की दुहाई दी. ऐसे लोगों का कहना था कि जब इसी तरह कहीं भी उत्तेजित भीड़ कानून को अपने हाथ में लेने लगे, तो कानून का राज कैसे स्थापित होगा. नगर के जागरूक लोगों ने अतिक्रमण हटाने के हाइ कोर्ट के आदेश की सराहना करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को उचित ठहराया.