चिंता : ओवरलोडेड नावों से भी हादसे का खतरा!

चेचर से लेकर खालसा तक गंगा नदी काफी गहरी, यहां होते हैं लगातार नाव हादसे हाजीपुर : सरकार के निर्देशों के बाद भी चकौसन के जिमदारी घाट एवं रुस्तमपुर व कच्ची दरगाह घाट समेत कई घाटों पर ओवर लोडेड नाव का परिचालन धड़ल्ले से जारी है. नियमों को ताक पर रखकर लगभग 150 से अधिक […]

चेचर से लेकर खालसा तक गंगा नदी काफी गहरी, यहां होते हैं लगातार
नाव हादसे
हाजीपुर : सरकार के निर्देशों के बाद भी चकौसन के जिमदारी घाट एवं रुस्तमपुर व कच्ची दरगाह घाट समेत कई घाटों पर ओवर लोडेड नाव का परिचालन धड़ल्ले से जारी है. नियमों को ताक पर रखकर लगभग 150 से अधिक यात्रियों को बैठा कर नाव नदी पार करती है. खासकर नाविकों का कहना है कि चेचर से लेकर खालसा तक गंगा नदी काफी गहरी है, जिसके कारण नाव हादसे होते रहे है.
नाव परिचालन के लिए तय मानक : गंगा नदी में परिचालित सभी नावों का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है. एक नाव पर पंद्रह यात्री से ज्यादा बैठाने पर सरकारी मनाही है. साथ ही नाविक को तैरने की जानकारी भी होनी चाहिए और नाविक नाबालिग नहीं होना चाहिए. लेकिन नियमों को ताक पर रखकर बेरोक टोक केवल जिम्मेदारी घाट से लगभग 45 नावों को लगभग 150 यात्रियों को बैठाकर प्रत्येक दिन परिचालित होते देखा जाता है.
पूर्व विधायक सतीश कुमार ने अंचलाधिकारी एवं जिलाधिकारी को आवेदन देकर ओवरलोडेड नाव परिचालन पर रोक लगाने की मांग की है, साथ ही उन्होंने 15 साल से ज्यादा पुराने नावों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग भी की है.
तीन महीने पहले भी हुआ था हादसा, बाल-बाल बचे थे सभी : घटना से महज तीन माह पहले दो जुलाई को भी बिशनपुर सैदअली के नाविक लालू राय का नाव ठीक इसी तरह डूब गया था, लगभग 150 यात्रियों से खचाखच भरा नाव, जिस पर आठ बाइक भी लदे थे. गंगा नदी में डूबी थी, लेकिन सभी यात्री बाल बाल बच गये थे. इससे पूर्व माह नवंबर 2015 में भी राघोपुर बीडीओ की गाड़ी डूब गयी थी. वर्ष 2012 में भी बिहार राज्य खाद्य निगम का चावल जन वितरण प्रणाली दुकान पर जा रहा था.
इसी बीच चावल से लदी नाव बीच नदी में डूब गयी थी. इससे पूर्व वर्ष 2007 और 2005 में भी नाव डूबी थी.लेकिन सभी यात्री सकुशल नदी से बाहर निकाल लिए गये थे. इससे पूर्व वर्ष 1997 में एक बड़ा नाव हादसा हुआ था, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की जीप, एक राजदूत मोटरसाइकिल, तीन स्वास्थ्य कर्मी और बिशनपुर के संजय राय समेत आधे दर्जन से अधिक लोग नाव सहित गंगा में विलीन हो गये थे. जिसका अब तक कोई पता नहीं लगाया जा सका है. हलांकि गोताखोर व महाजाल की व्यवस्था कर लाख प्रयासों के बावजूद आज तक किसी का पता नहीं लगा.
अधिकारी बोले
ओवरलोडेड नावों के परिचालन पर पूर्णतः पाबंदी लगायी गयी है, इसके बावजूद भी अगर कोई ओवरलोड करते पकड़े गये तो रजिस्ट्रेशन रद्द कर नाविक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जायेगी.
संजय कुमार राय,अंचलाधिकारी

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