महुआ नगर : मन की मुराद पूरी करने वाली गोविंदपुर सिंघाड़ा वाली मैया के दरबार में पूरे बिहार के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. लगभग दो सौ वर्षों से होती आ रही पूजा में माता के महिमा की कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन संपूर्ण विधि विधान से नियत समय पर सभी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
महुआ नगर : मन की मुराद पूरी करने वाली गोविंदपुर सिंघाड़ा वाली मैया के दरबार में पूरे बिहार के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. लगभग दो सौ वर्षों से होती आ रही पूजा में माता के महिमा की कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन संपूर्ण विधि विधान से नियत समय पर सभी पूजन कार्य संपन्न होने से माता खुश रहती हैं.
पूजा की शुरुआत कैसे हुई, इस संबंध में मेला आयोजक सोहन सिंह एवं मोहन सिंह बताते हैं कि लगभग दो सौ पूर्व उनके महरौर वंश के पूर्वज राधाजीवन सिंह को सपने में मां भगवती ने उक्त स्थान पर मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना करने का आदेश दिया.आदेश का पालन करते हुए राधाजीवन सिंह ने यहां मंदिर बनवा कर पूजा की शुरुआत की..
क्या है मान्यता : गोविंदपुर सिंघाड़ा वाली इस मैया के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से माता के दरबार में पहुंच, जो भी मांगता है, माता उसको पूर्ण करती हैं.
पूजन विधि एवं मूर्ति की क्या है विशेषता : यहां पूजा के लिए बनायी जाने वाली मूर्ति की विशेषता है कि यहां सैकड़ों वर्षों से एक ही आकृति की जीवंत मूर्ति बनायी जाती है. इतना ही नहीं मूर्ति बनाने वाले कारीगर स्थानीय ग्रामीण बैजू पंडित एवं उनके खानदान के लोग ही हैं. यहां पंचमी की रात्रि में दो बकरों की बलि के साथ ही माता का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है तथा अगले दिन से बलि सहित अन्य पूजन कार्य नियत समयानुसार संपन्न होते है.
बलि प्रथा के लिए प्रसिद्ध
छपरा, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर व पटना सहित अन्य जिलों से लाखों श्रद्धालु अपनी-अपनी मन्नत उतारने के लिए माता के दरबार में पहुंचते हैं. मेला आयोजक गुलाब सिंह, मोहन सिंह, सोहन सिंह, सनोज सिंह, संजय सिंह, डब्ल्यू सिंह आदि बताते हैं कि मनोकामना पूरी करनेवाली माता की कृपा से ही सारा कार्य विधिवत ससमय पूरा होता है.
कैसे पहुंचें
जिला मुख्यालय हाजीपुर से सड़क द्वारा महुआ बाजार एवं वहां से आठ किलोमीटर पूर्व महुआ-ताजपुर सड़क मार्ग एवं महुआ जंदाहा सड़क मार्ग के ठीक बीचोबीच सिंघाड़ा गांव के अंतिम छोर पर मंदिर स्थित है. समस्तीपुर सहित अन्य दिशाओं से आने वाले भक्त भी कुशहर चौक से मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं.