भरण-पोषण कैसे होगा अल्लाह ही बेहतर जाने

पानी में गल गयी धान की पूरी फसल बिचड़ा तक नहीं बचा, ताकि दोबारा हो रोपनी किसानों के चेहरे का उड़ चुका है रंग कमतौल : क्षेत्र में बाढ़ का पानी घटने के कारण कई गांव के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, परंतु बाढ़ ने किसानों के दिलों के अरमान को चकनाचूर […]

पानी में गल गयी धान की पूरी फसल
बिचड़ा तक नहीं बचा, ताकि दोबारा हो रोपनी
किसानों के चेहरे का उड़ चुका है रंग
कमतौल : क्षेत्र में बाढ़ का पानी घटने के कारण कई गांव के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, परंतु बाढ़ ने किसानों के दिलों के अरमान को चकनाचूर कर दिया है.
धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गयी है. बाढ़ प्रभावित रतनपुर को जिले में धान का कटोरा कहा जाता है. रतनपुर के किसान मुरारी ठाकुर, धर्मेन्द्र प्रताप ठाकुर, रमेन्द्र प्रताप ठाकुर, गोपी कृष्ण ठाकुर, रमेश कुमार झा, अशोक कुमार झा, कृष्ण कुमार ठाकुर, अखिलेश कुमर, हरीशचन्द्र ठाकुर, विनय कुमार ठाकुर, चुलबुल ठाकुर ने बताया कि धान के कटोरा में पानी नहीं बल्कि पानी में कटोरा डूब गया.
धान की फसल चौपट हो गयी. किसान राम सागर झा, सुख सागर झा, विजय शाही, शिव कुमार झा का कहना है कि खेतों में धान की फसल लहलहा रही थी. कुछ खेत में रोपनी किये हुए एक-दो सप्ताह ही हुआ था. अचानक बाढ़ के पानी ने उसको डुबो दिया. उम्मीद थी कि अगर एक-दो दिन के अंदर पानी घट जाता है, तो फसल को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
पानी लगभग एक सप्ताह से ज्यादा दिन तक धान के फसल को डुबा कर रखा. इसके चलते फसल सड़-गल गयी. कुम्हरौली गांव के किसान अनवर ने बताया कि धान की फसल पूर्णरूप से चौपट हो गई है. अब धान का बिचरा भी नहीं बचा कि दोबारा धान की रोपनी करें. अहियारी गोट के किसान मो. नईमुद्दीन ने बताया कि बाढ़ ने धान की फसल को पूर्ण रूप से चौपट कर दिया है. अब साल भर परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, अल्लाह ही बेहतर जानें.

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