बिहार के मंत्री आलोक मेहता को जान से मारने की धमकी देने के मामले में दो पर केस, सीएम बोले- हो रही तहकीकात

सचिवालय थाने के प्रभारी एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि मामले में जांच चल रही है और दोनों ही मोबाइल नंबरों का डिटेल निकाला जा रहा है. मालूम हो कि मंत्री आलोक मेहता को मोबाइल से धमकी दी गयी और अपशब्दों का प्रयोग किया गया.

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार व गन्ना उद्योग मंत्री आलोक मेहता को जान से मारने की धमकी देने के मामले में दो लोग दीपक पांडेय व पप्पू त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इन दोनों पर मंत्री की लिखित शिकायत के आधार पर सचिवालय थाने में मामला दर्ज किया गया है. मंत्री ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि उन्हें सोमवार को दो अलग-अलग फोन नंबरों से कॉल कर भद्दी-भद्दी गालियों के साथ साथ जान से मारने की धमकी भी दी गयी.

मामले में चल रही जांच

सचिवालय थाने के प्रभारी एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि मामले में जांच चल रही है और दोनों ही मोबाइल नंबरों का डिटेल निकाला जा रहा है. मालूम हो कि मंत्री आलोक मेहता को मोबाइल नंबर 9140245089 और 9648076657 से धमकी दी गयी और अपशब्दों का प्रयोग किया गया. फिलहाल दोनों ही नंबर स्विच ऑफ हैं. मंत्री जी के सरकारी मोबाइल पर फोन कर धामी दी गयी थी.

सीएम बोले-मामले में हो रही तहकीकात

जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने मंत्री आलोक मेहता को धमकी देने के मामले को लेकर कहा कि मुझे इसकी जानकारी मिली है. इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जा रही है. एक-एक पहलू की तहकीकात की जा रही है.

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मंत्री ने बीते दिनों दिया था विवादित बयान

बता दें कि मंत्री आलोक मेहता ने एक विवादित बयान दिया था. जिसके बाद से बिहार में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गयी थी. मंत्री ने अपने बयान में दस फीसदी आरक्षण पाने वाले लोगों को अंग्रेजों का दलाल बताया थे. आलोक मेहता ने भागलपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जगदेव बाबू ने दलित, शोषित, पिछड़े और वंचितों के उत्थान की लड़ाई लड़ी, जिनकी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है. उन्हें समाज में कोई सम्मान नहीं मिलता था. वहीं जो आज दस फीसदी आरक्षण वाले हैं, उन्हें अंग्रेजों ने जाते वक्त सैकड़ों एकड़ जमीन देकर जमींदार बना दिया, जबकि मेहनत, मजदूरी करने वाले आज तक भूमिहीन बने हुए हैं.

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