प्रतापगंज (सुपौल) से सरोज कुमार महतो की रिपोर्ट. प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और रक्षा सूत्र बांधा.
इन प्रमुख स्थानों पर उमड़ी भीड़
प्रतापगंज थाना क्षेत्र के लगभग हर गांव में वट वृक्षों के नीचे सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई. मुख्य रूप से:
- प्रखंड मुख्यालय के विभिन्न स्थल
- सीएसपी परिसर और ठाकुरबाड़ी परिसर
- सिमराही रोड स्थित शिवालय के समीप स्थित वट वृक्ष
इन जगहों पर महिलाओं ने पूरी आस्था के साथ वट वृक्ष को बांस के पंखे से हवा झली और विधिवत पूजा संपन्न की.
ब्रह्मा, विष्णु और महेश का होता है वास
पूजा करा रहे पुरोहित चन्द्रा नन्द मिश्र ने इस पर्व के पौराणिक महत्व को बताते हुए कहा:
- त्रिदेवों का वास: बरगद (वट) के वृक्ष में साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, इसलिए इसे बेहद पवित्र वृक्ष कहा गया है.
- कथा का महत्व: इसी वृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और व्रत के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी.
यह पूजा हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन की जाती है, जिसमें सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं.
दिनभर फलाहार पर रहती हैं व्रती
पूजा में शामिल महिलाओं ने बताया कि यह व्रत दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस दिन महिलाएं दिनभर फलाहार पर रहकर व्रत के नियमों का पालन करती हैं. पूजा के बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी गई और सामूहिक रूप से आरती कर सुख-समृद्धि की कामना की गई.
