शिक्षा विभाग में बड़े घोटाले का प्रयास नाकाम, फर्जी पे आईडी बनाकर सरकारी राशि भेजने की साजिश का खुलासा

सुपौल डीईओ कार्यालय में फर्जी पे आईडी बनाकर सरकारी राशि गबन करने की साजिश को अधिकारियों ने नाकाम कर दिया है. मामले में दोषी पाए गए दो लिपिकों के खिलाफ आरोप पत्र गठित करते हुए उनके तत्काल निलंबन की अनुशंसा की गई है.

सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट. शिक्षा विभाग में सरकारी राशि के गबन की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय, सुपौल में कार्यरत दो लिपिकों पर फर्जी पे आईडी (Pay ID) बनाकर शिक्षकों के पहले से भुगतान किए जा चुके बकाया वेतन की राशि को किसी दूसरे खाते में भेजने का गंभीर आरोप लगा है. मामले के उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

शिक्षकों के पुराने बिलों का दोबारा इस्तेमाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीईओ कार्यालय के उच्च वर्गीय लिपिक उमेश वर्मा तथा निम्न वर्गीय लिपिक मो. ऐहतेशामुल हक पर आपराधिक षड्यंत्र रचकर सरकारी राशि गबन करने की नीयत से फर्जी पे आईडी तैयार करने का आरोप है. बताया गया है कि शिक्षकों के जिन वेतन विपत्रों (बिलों) का पूर्व में ही वैध भुगतान हो चुका था, उन्हीं की राशि को दोबारा किसी अन्य खाते में ट्रांसफर करने का प्रयास किया जा रहा था.

समय रहते रोका गया गबन

मामले की भनक लगते ही जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO), स्थापना, सुपौल द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई. उन्होंने तत्काल संबंधित डिजिटल विपत्रों को रीकॉल (वापस) करा दिया, जिससे सरकारी खजाने से होने वाला यह संभावित वित्तीय घोटाला टल गया.

अधिकारियों ने की निलंबन और कार्रवाई की अनुशंसा

इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने ज्ञापांक 1936 (नि) एवं 1937 (नि) दिनांक 15 मई 2026 के माध्यम से दोनों कर्मियों के विरुद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) गठित कर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है.

वहीं, जिलाधिकारी (DM), सुपौल ने क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (RDD), कोशी प्रमंडल, सहरसा को पत्र भेजा है. इस पत्र में दोनों लिपिकों पर बिहार कोषागार कोड एवं बिहार वित्तीय नियमावली के नियमों के उल्लंघन सहित सरकारी राशि के गबन की मंशा रखने का दोषी पाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का अनुरोध किया गया है. मामला प्रकाश में आने के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं.

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Published by: Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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