Supaul News: सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज बाजार क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित निजी नर्सिंग होम, क्लिनिक, लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है. शनिवार को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने एक संदिग्ध उमदा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी की. टीम के पहुंचते ही संचालक और वहां मौजूद कर्मी मौके से फरार हो गए, जिसके बाद जांच टीम ने सेंटर को सील कर दिया. प्रारंभिक जांच में सेंटर के संचालन से संबंधित कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है.
कार्रवाई के दौरान अनुमंडलीय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. उमेश कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी परमानंद प्रसाद के नेतृत्व में टीम ने दस्तावेजों की जांच की और परिसर से मरीजों का रिकॉर्ड भी बरामद किया.
छापेमारी के दौरान मिली कई अनियमितताएं
स्वास्थ्य विभाग की टीम के अनुसार सेंटर में बड़ी संख्या में मरीजों के नाम दर्ज पंजी मिले, जिससे संकेत मिलता है कि यहां लंबे समय से जांच की जा रही थी.
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि सेंटर करीब एक वर्ष से अधिक समय से बाजार क्षेत्र में संचालित था और इस दौरान अनेक मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच की गई.
टीम में बीडीओ परमानंद प्रसाद, हेल्थ मैनेजर एस. अदीब अहमद और पुलिस बल भी शामिल था.
डॉक्टर के कागजात मिले, लेकिन संचालन की अनुमति नहीं
जांच के दौरान सेंटर के कर्मियों ने एक डॉक्टर का एफिडेविट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र टीम को दिखाया.
अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज डॉ. आदित्य जी कुशवाहा के नाम से थे और प्रारंभिक जांच में शैक्षणिक कागजात सही पाए गए.
बताया गया कि संबंधित डॉक्टर का बिहार मेडिकल काउंसिल में मार्च 2016 में पंजीकरण हुआ था और उन्होंने एमबीबीएस तथा डीएमआरडी की डिग्री प्राप्त की है.
हालांकि, जांच के समय डॉक्टर स्वयं सेंटर पर मौजूद नहीं थे.
अल्ट्रासाउंड संचालन का पंजीयन नहीं मिला
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सेंटर के संचालन की अनुमति, पंजीयन प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए.
यही कारण रहा कि टीम ने सेंटर के वास्तविक संचालन पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे तत्काल सील कर दिया.
अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया यह संदेह है कि सेंटर का संचालन ऐसे लोगों द्वारा किया जा रहा था, जिनके पास अल्ट्रासाउंड संचालन के लिए आवश्यक योग्यता और वैध अनुमति नहीं थी.
एक साल तक चलता रहा सेंटर, विभागीय निगरानी पर भी सवाल
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि सेंटर पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बाजार क्षेत्र में संचालित था, तो संबंधित विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली.
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में मरीज यहां जांच कराने आते थे, फिर भी कार्रवाई इतनी देर से हुई.
संचालक और फरार कर्मियों की तलाश जारी
स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर को सील करने के बाद संचालक और फरार कर्मियों की तलाश शुरू कर दी है.
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि सेंटर का संचालन कथित तौर पर जरेला निवासी नवनीत कुमार द्वारा किया जाता था, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
Supaul News: सुपरिटेंडेंट ने क्या कहा
अनुमंडलीय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान संचालक मौके पर नहीं मिले.
उन्होंने कहा कि कर्मियों द्वारा दिखाए गए डॉक्टर के शैक्षणिक कागजात सही पाए गए, लेकिन अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालन की अनुमति या पंजीयन संबंधी कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया.
इसी आधार पर सेंटर को सील कर दिया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है.
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