पछुआ हवा के रौद्र रूप से कांपा सुपौल, ठंड से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

पछुआ हवा के रौद्र रूप से कांपा सुपौल, ठंड से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

सूरज की बेरुखी और बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई गलन, चौक-चौराहों पर अलाव ही एकमात्र सहारा सुपौल. जिले में इन दिनों पछुआ हवा ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. तेज और सर्द पछुआ की मार से गलन इस कदर बढ़ गयी है कि आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. बीते कई दिनों से सूरज के दर्शन नहीं होने के कारण ठंड और भी ज्यादा जानलेवा महसूस हो रही है. सुबह से लेकर शाम तक कोहरे और ठंडी हवा का ऐसा असर है कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं. सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है और जो लोग जरूरी काम से बाहर निकल भी रहे हैं, वे पूरी तरह ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आते हैं. धूप नहीं निकलने से हालात और भी खराब हो गये हैं. आमतौर पर ठंड के मौसम में लोग धूप का सहारा लेते हैं, लेकिन इस बार सूरज की गैरमौजूदगी ने परेशानी दोगुनी कर दी है. ग्रामीण इलाकों में गरीब और मजदूर वर्ग के लोग ठंड से बचने के लिए लकड़ी और कूड़ा-कचरा जलाकर आग तापते नजर आ रहे हैं. चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों में अलाव जलाना अब आम दृश्य बन गया है. शहरों में लोग हीटर और ब्लोअर के सहारे शरीर को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं. ठंड का सीधा असर रोजगार और कृषि कार्यों पर भी पड़ा है. दिहाड़ी मजदूरों के लिए काम मिलना मुश्किल हो गया है, वहीं खेतों में किसान भी सुबह देर से निकल पा रहे हैं. स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह मौसम खतरनाक साबित हो रहा है. अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. डॉक्टरों ने इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने और गर्म भोजन व कपड़ों का उपयोग करने की सलाह दी है. मौसम विभाग के अनुसार पछुआ हवा का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है. जब तक धूप नहीं निकलती, तब तक ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है. ऐसे में स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों से गरीब व बेसहारा लोगों के लिए व्यापक स्तर पर अलाव और कंबल की व्यवस्था करने की मांग उठने लगी है.

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