वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट
Supaul News: सुपौल जिले के बसंतपुर प्रखंड स्थित ई-किसान भवन में आयोजित शारदीय खरीफ कर्मशाला में किसानों को आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं और बागवानी फसलों के जरिए आय बढ़ाने के उपाय बताए गए. कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की.
कर्मशाला का उद्घाटन बसंतपुर प्रखंड जदयू अध्यक्ष अनिल कुमार खेड़वार, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष पवन कुमार मेहता, व्यापार मंडल अध्यक्ष श्रीलाल गोठिया, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अमित कुमार, कृषि समन्वयक धर्मेंद्र कुमार, राजीव रंजन, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी मिथिलेश कुमार क्रांति तथा प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
फॉर्मर रजिस्ट्री से पीएम किसान तक, योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया. किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, बीज अनुदान योजना, मृदा जांच योजना और बिहार कृषि एप के उपयोग तथा आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी गई.
अधिकारियों ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को समय पर पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेजों को अपडेट रखना चाहिए. इससे सरकारी सहायता सीधे किसानों तक पहुंच सकेगी.
केला खेती से बढ़ सकती है किसानों की आमदनी
कर्मशाला में प्रखंड उद्यान पदाधिकारी मिथिलेश कुमार क्रांति ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी फसलों को अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि बसंतपुर और आसपास के क्षेत्रों में केला खेती की अपार संभावनाएं हैं. यहां जलवायु और बाजार दोनों अनुकूल हैं, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है.
उन्होंने बताया कि केले की मांग लगातार बढ़ रही है और यह किसानों के लिए आय बढ़ाने का अच्छा विकल्प बन सकता है. इसके अलावा किसानों को आम के पौधे भी उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी.
आधुनिक खेती अपनाने का दिया गया संदेश
कृषि अधिकारियों ने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने, उन्नत बीजों का उपयोग करने और कृषि विभाग की योजनाओं से जुड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत भी कम की जा सकती है.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और कृषि विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे. इस दौरान किसानों ने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं और खेती से जुड़े विषयों पर जानकारी भी प्राप्त की.
