सरकारी जमीन अतिक्रमण मामले में सीओ की कार्यशैली पर उठे सवाल, एडीएम ने की अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा

सुपौल जिले में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण का मामला गरमा गया है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (ADM) ने अंचल अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे जिलाधिकारी से अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है. यह मामला शनिचर हाट की सरकारी जमीन से जुड़ा है.

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र स्थित सैरात शनिचर हाट की सरकारी जमीन पर कथित अवैध अतिक्रमण के मामले में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता (एडीएम) ने गंभीर टिप्पणी की है. एडीएम ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार मानते हुए जिलाधिकारी को अंचल अधिकारी प्रियंका सिंह के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है.

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की हुई थी शिकायत

मामला खाता संख्या 277, खेसरा संख्या 2058 की लगभग 3 बीघा 5 कट्ठा सरकारी भूमि से जुड़ा है. परिवादी दीपक कुमार ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि इस बहुमूल्य सरकारी जमीन पर कुछ लोगों द्वारा पक्का निर्माण कर अवैध कब्जा किया जा रहा है.

सीओ की रिपोर्ट पर उठा विवाद

Land Encroachment: जांच के दौरान अंचल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि शनिचर हाट की चौहद्दी का उल्लेख उपलब्ध नहीं है तथा भूमि अधिग्रहण से संबंधित कोई अभिलेख अंचल कार्यालय में उपलब्ध नहीं है. इसी आधार पर उन्होंने भूमि की मापी कराने में असमर्थता जताई और शिकायतकर्ता को आरसीएमएस पोर्टल पर नया आवेदन देने की सलाह दी. बाद में अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने भी इसी रिपोर्ट के आधार पर मामले का निष्पादन कर दिया.

प्रथम अपील में सामने आई नई रिपोर्ट

परिवादी ने इस निर्णय के विरुद्ध जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में प्रथम अपील दायर की. सुनवाई के दौरान एडीएम ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि संबंधित भूमि के संबंध में कभी कोई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया नहीं हुई थी. इससे यह तथ्य सामने आया कि संबंधित भूमि अंचल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र की सरकारी जमीन है, जिसकी सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी अंचल प्रशासन की है.

एडीएम ने कार्यशैली पर जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान एडीएम ने पाया कि अंचल अधिकारी ने अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया और वरीय अधिकारियों के निर्देशों का भी पालन नहीं किया. आदेश में कहा गया कि प्रथम दृष्टया उनकी कार्यशैली अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने वाली प्रतीत होती है. साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि उनका आचरण बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 की भावना के अनुरूप नहीं है.

डीएम को भेजी कार्रवाई की अनुशंसा

Land Encroachment: मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम ने अपने अंतिम आदेश की प्रति जिलाधिकारी सुपौल एवं स्थापना उपसमाहर्ता को भेजते हुए अंचल अधिकारी के विरुद्ध तत्काल नियमसंगत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है. इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामलों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गयी है.


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लेखक के बारे में

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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