Supaul News: सुपौल जिले के निर्मली क्षेत्र में नागपंचमी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं. पिपरा प्रखंड के पथरा उत्तर पंचायत स्थित जोल्हनियां कैलाशपुरी मेला स्थल पर 2 अगस्त रविवार को दोपहर 2 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी. इस बैठक में आगामी 17 अगस्त को होने वाले एक दिवसीय नागपंचमी मेले की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी.
कैलाशपुरी मेला समिति के अनुसार उत्तर बिहार के प्रसिद्ध कैलाशपुरी मंदिर में नागपंचमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसी को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और गणमान्य लोगों को बैठक में आमंत्रित किया गया है.
श्रद्धालुओं की सुविधा होगी प्राथमिकता
बैठक में सबसे बड़ा फोकस श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर रहेगा. मेला समिति ने बताया कि पूजा-अर्चना के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी.
मंदिर परिसर में विधि-व्यवस्था बनाए रखने, प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने, साफ-सफाई, पेयजल उपलब्धता, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी. इसके अलावा मेले के दौरान आवश्यक अस्थायी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जाएगा.
माता बिषहरी के दरबार में उमड़ती है आस्था
कैलाशपुरी मेला समिति के सचिव सुनील कुमार ने बताया कि नागपंचमी के दिन कैलाशपुरी मंदिर परिसर स्थित माता बिषहरी के दरबार में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
सुपौल सहित आसपास के कई जिलों से लोग बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ माता बिषहरी को दूध और लावा अर्पित करते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार श्रद्धालु यहां मनोकामना लेकर आते हैं और पूजा-अर्चना के बाद अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं.
प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से होगा आयोजन
मेला समिति का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग आवश्यक है.
इसी उद्देश्य से 2 अगस्त की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि सभी पक्षों के सुझाव लेकर समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी की जा सकें.
Supaul News: सभी से बैठक में शामिल होने की अपील
सचिव सुनील कुमार ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से बैठक में शामिल होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता से ही नागपंचमी मेले को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया जा सकता है.
