Supaul News: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड में कथित फर्जी जमाबंदी के जरिए पैतृक जमीन हड़पने का मामला सामने आया है. पीड़ित का आरोप है कि वर्षों से परिवार के कब्जे वाली जमीन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से जमाबंदी करा ली गई. इतना ही नहीं, जमीन पर खेती भी की जा रही है और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है. पीड़ित ने अब जिलाधिकारी सुपौल को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच, फर्जी जमाबंदी रद्द करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. मामला सामने आने के बाद राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं.
पिपरा प्रखंड के सखुआ गांव का मामला
यह मामला सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत सखुआ पंचायत के वार्ड संख्या-1 का है. पीड़ित ब्रह्मदेव यादव ने जिलाधिकारी को दिए आवेदन में बताया है कि मौजा सखुआ, खाता संख्या-3 के विभिन्न खेसरों की जमीन उनके पूर्वजों की पैतृक संपत्ति है. परिवार का वर्षों से इस भूमि पर कब्जा रहा है.
उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया.
7 मई 2023 को फर्जी तरीके से जमाबंदी दर्ज कराने का आरोप
आवेदन के अनुसार, 7 मई 2023 को बिना पर्याप्त साक्ष्य और वैध अभिलेखों के कथित रूप से जमाबंदी संख्या-1788 में आरोपितों के नाम प्रविष्टि कर दी गई.
पीड़ित का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में राजस्व नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी जमाबंदी तैयार की गई. उनका आरोप है कि यह कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई.
जमीन पर खेती और विरोध करने पर धमकी का आरोप
ब्रह्मदेव यादव का आरोप है कि फर्जी जमाबंदी के आधार पर संबंधित लोग उनकी पैतृक जमीन पर जबरन जोत-आबाद कर खेती कर रहे हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई. इस कारण परिवार में भय का माहौल बना हुआ है.
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही हो सकेगी.
अंचल कार्यालय से लेकर न्यायालय तक लगा चुके हैं गुहार
पीड़ित ने आवेदन में कहा है कि वह लंबे समय से न्याय की उम्मीद में अंचल कार्यालय से लेकर न्यायालय तक लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत संबंधित राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों की भी मांग की है, ताकि पूरी प्रक्रिया की जांच हो सके.
Supaul News: डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ब्रह्मदेव यादव ने जिलाधिकारी सुपौल से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
उन्होंने कथित फर्जी जमाबंदी को रद्द करने, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने और अपनी पैतृक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की अपील की है.
अब इस मामले में जिला प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं. जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा.
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