किसान सलाहकारों के ईपीएफ अंशदान में हेराफेरी

सभी लंबित अंशदान की राशि अविलंब संबंधित खातों में जमा कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है.

– आत्मा कार्यालय के लेखापाल पर गबन का आरोप

– लेखापाल हर्ष रंजन फरार, प्राथमिकी दर्ज

– ईपीएफ राशि जमा नहीं होने पर खुला मामला

सुपौल.

जिले के कृषि विभाग से जुड़ी एक बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है. किसान सलाहकारों के कर्मचारी भविष्य निधि ( ईपीएफ) अंशदान की राशि उनके खातों में जमा नहीं होने के मामले में आत्मा (आत्मा ) कार्यालय, सुपौल के लेखापाल हर्ष रंजन पर सरकारी राशि के गबन का आरोप लगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उप परियोजना निदेशक, आत्मा, सुपौल ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराया है.

किसान सलाहकार संघ, सुपौल ने 11 मई को जिला कृषि पदाधिकारी को आवेदन देकर शिकायत की थी कि अप्रैल 2024 से उनके मानदेय से ईपीएफ की कटौती की जा रही है, लेकिन अधिकांश सलाहकारों के यूएएन खातों में राशि अद्यतन नहीं हो रही है. कई खातों में शून्य राशि दिखाई दे रही है, जबकि कुछ खातों में केवल सीमित अवधि तक ही अंशदान जमा हुआ है.

आत्मा कार्यालय के लेखापाल से मांगा स्पष्टीकरण

शिकायत मिलने पर जिला कृषि पदाधिकारी ने आत्मा कार्यालय के लेखापाल हर्ष रंजन से स्पष्टीकरण मांगा. लेखापाल ने प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी त्रुटियों और यूएएन संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए कुछ दिनों में सभी खातों को अद्यतन कराने का आश्वासन दिया था. लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. इस बीच यह भी सामने आया कि लेखापाल 12 मई 2026 से बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित हैं. उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ मिल रहा है और उनके अस्थायी व स्थायी निवास पर भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है.

मामले की जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा में संचालित आत्मा कार्यालय के खाते का विवरण प्राप्त कर मिलान किया गया. प्रारंभिक जांच में यह आशंका व्यक्त की गई है कि ईपीएफ अंशदान की राशि नियमानुसार भविष्य निधि खाते में जमा कराने के बजाय अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी गई. जिला कृषि कार्यालय द्वारा क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त, भागलपुर से सत्यापन कराने पर लेखापाल द्वारा प्रस्तुत किए गए ईपीएफ चालानों की पुष्टि नहीं हो सकी. उप परियोजना निदेशक ने अपने आवेदन में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह सरकारी राशि के गबन का मामला प्रतीत होता है. विस्तृत जांच के बाद गबन की वास्तविक राशि और अन्य अनियमितताओं का खुलासा हो सकेगा.

किसान सलाहकार संघ के जिलाध्यक्ष सचिन कुमार सिंह ने मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि ईपीएफ राशि जमा नहीं होने के कारण सैकड़ों किसान सलाहकार आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं. सभी लंबित अंशदान की राशि अविलंब संबंधित खातों में जमा कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है. कहा कि सिर्फ कृषि विभाग के किसान सलाहकार ही नहीं एटीएम, बीटीएम, लेखपाल, कार्यपालक सहायक के भी ईपीएफ में भारी अनियमितता बरती गई है. मामले ने जिले के कृषि विभाग और आत्मा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं.

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