आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से एलडीएम सुपौल और जिले के सभी बैंक शाखा प्रबंधकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. बैठक में एसीजेएम-प्रथम सह प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल मो. अफजल आलम ने बैंक अधिकारियों के साथ ऋण संबंधी मामलों के अधिक से अधिक निस्तारण को लेकर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने समझौता योग्य मामलों को चिह्नित कर संबंधित ऋणधारकों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवाद खत्म करने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया.
ऋण विवाद खत्म करने का मिलेगा आसान रास्ता
बैठक में ऋण वसूली से जुड़े सुलहनीय मामलों के आपसी समझौते के माध्यम से निपटारे पर विशेष जोर दिया गया. मो. अफजल आलम ने बैंक अधिकारियों से कहा कि ऐसे ऋण खातों की पहचान की जाए, जिनमें दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान संभव है.
उन्होंने संबंधित ऋणधारकों से संपर्क कर उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होने और बैंक के साथ आपसी सहमति से अपने ऋण मामले का समाधान कराने के लिए प्रेरित करने को कहा.
समय और पैसे दोनों की होगी बचत
एसीजेएम-प्रथम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत बैंक ऋण से जुड़े मामलों के त्वरित और सरल समाधान का प्रभावी माध्यम है. इसमें बैंक और ऋणधारक दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का निपटारा कर सकते हैं. इससे लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलने के साथ ही दोनों पक्षों के समय और धन की बचत होती है.
लंबित मामलों की सूची तैयार करने का निर्देश
उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि समझौता योग्य ऋण मामलों में संबंधित पक्षकारों को अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराया जाए. उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत की प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी दी जाए.
साथ ही निर्धारित तिथि से पहले सभी जरूरी कार्रवाई पूरी करने और बैंक शाखाओं में लंबित ऋण मामलों की सूची तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रस्तुत करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा गया.
बैंक अधिकारियों ने दिया सहयोग का भरोसा
बैठक के दौरान एलडीएम सुपौल सहित जिले के विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों ने अपने-अपने बैंक में लंबित ऋण संबंधी मामलों की जानकारी साझा की. अधिकारियों ने अधिक से अधिक मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण कराने में जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया.
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक समझौता योग्य ऋण मामलों का समाधान कराया जाए, ताकि बैंक और ऋणधारक दोनों को लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सके.
