सुपौल में वर्षों से जर्जर निर्मली-तुलापट्टी सड़क का टेंडर रद्द, 10 गांवों के लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी

सूपौल जिले में निर्मली-तुलापट्टी ग्रामीण सड़क के पक्कीकरण का टेंडर रद्द होने से करीब 10 गांवों के लोग नाराज हैं. दशकों से जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है. बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल से परेशान लोग नई निविदा की मांग कर रहे हैं.

Supaul News: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड में निर्मली से तुलापट्टी और रामनगर को जोड़ने वाली ग्रामीण सड़क एक बार फिर चर्चा में है. वर्षों से बदहाल पड़ी इस सड़क के पक्कीकरण की उम्मीद तब जगी थी जब इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन अब टेंडर रद्द होने की सूचना ने करीब 10 गांवों के हजारों लोगों को निराश कर दिया है.

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों से यह सड़क केवल वादों और कागजी प्रक्रियाओं में उलझी रही, जबकि हर बरसात में उनकी जिंदगी कीचड़ और जलजमाव में फंस जाती है. अब लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द नई निविदा जारी कर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे.

बरसात में कीचड़, गर्मी में रेगिस्तान जैसी हालत

ग्रामीणों के अनुसार इस सड़क पर अब तक केवल एक-दो बार औपचारिकता के तौर पर मिट्टी भराई कराई गई, लेकिन उससे स्थिति में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ. बरसात के दिनों में पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है.

गर्मी के मौसम में स्थिति दूसरी तरह से विकट हो जाती है. सड़क पर बालू की मोटी परत जमा हो जाती है, जिससे दोपहिया वाहन बार-बार फंस जाते हैं और छोटे चारपहिया वाहन इस रास्ते से गुजरने से बचते हैं. कई बार एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी लंबा चक्कर लगाना पड़ता है.

टेंडर रद्द होने से टूटी वर्षों पुरानी उम्मीद

स्थानीय लोगों ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले सड़क के पक्कीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिली थी. इससे गांवों में यह उम्मीद जगी थी कि अब वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा.

लेकिन हाल में टेंडर रद्द होने की सूचना मिलने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से निविदा रद्द हुई है, तो संबंधित विभाग को तुरंत नई निविदा जारी कर निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए.

नहर पुल तक सड़क बनी, आगे का हिस्सा अब भी जर्जर

तुलापट्टी की ओर से बड़ी नहर पुल तक सड़क का पक्कीकरण पहले ही किया जा चुका है, लेकिन नहर पुल से निर्मली वार्ड संख्या-5 तक का हिस्सा अब भी बदहाल है.

इसी अधूरे हिस्से के कारण पूरे मार्ग का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क का अधिकांश भाग बन चुका है, तो शेष हिस्से को वर्षों तक अधूरा छोड़ना विकास योजनाओं की गंभीर उपेक्षा को दर्शाता है.

किसानों पर सबसे अधिक असर

सड़क की खराब स्थिति का सबसे बड़ा असर स्थानीय किसानों पर पड़ रहा है. फसल कटाई के समय ट्रैक्टर, थ्रेसर और अन्य कृषि वाहन इस मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी झेलते हैं.

बरसात में वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं, जबकि सूखे मौसम में बालू के कारण ढुलाई की लागत बढ़ जाती है. किसानों का कहना है कि उन्हें कई बार 10 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ जाते हैं.

राजेन्द्र निराला, सत्यनारायण मंडल, शिवनारायण मंडल, रामनारायण मंडल, सुरेश मंडल, देवनारायण मंडल, उमाशंकर मंडल, जगदीश मंडल, रामोतार मंडल, कमल मंडल, मो. अब्बास, मो. नईम, शंकर मंडल, दिनेश मंडल और उमेश मंडल सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बदहाली अब आर्थिक बोझ में बदल चुकी है.

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों तक सड़क पहुंचाने और ग्रामीण संपर्क मार्गों को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन निर्मली-तुलापट्टी सड़क अब भी उपेक्षा का शिकार बनी हुई है.

लोगों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अविलंब नई निविदा जारी कर सड़क का पक्कीकरण कराया जाए और निर्माण कार्य की स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक की जाए.

Supaul News: आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे सड़क पर उतरकर चरणबद्ध आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन करेंगे.

उनका कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण का काम धरातल पर शुरू होता देखना चाहते हैं. यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी.

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लेखक के बारे में

By इंद्रभूषण कुमार

इंद्रभूषण प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. कटैया निर्मली (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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