निर्मली न्यायालय की समस्याओं पर अधिवक्ताओं ने प्रधान जिला जज से की बात, अभिलेख और वकालतखाना समेत कई मांगें

निर्मली व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ताओं ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह से मुलाकात कर सुविधाओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को उठाया. जेल निर्माण, लंबित दीवानी अभिलेखों की उपलब्धता और फौजदारी मामलों की सुनवाई जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई.

Nirmali Court News: निर्मली व्यवहार न्यायालय निर्मली में लंबे समय से चली आ रही सुविधाओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर अधिवक्ताओं ने अब प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के सामने अपनी बात रखी है. सुपौल न्याय मंडल के नव पदस्थापित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह के निर्मली पहुंचने पर अधिवक्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया.

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय निर्मली का निरीक्षण किया. इस दौरान न्यायालय की व्यवस्थाओं को देखा गया और स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ.

जेल से लेकर लंबित दीवानी अभिलेख तक उठे मुद्दे

अधिवक्ताओं ने निर्मली में जेल निर्माण की जरूरत का मुद्दा उठाया. इसके साथ ही न्यायालय के क्षेत्राधिकार से जुड़े सुपौल और वीरपुर में मौजूद शेष दीवानी वादों के अभिलेख निर्मली न्यायालय में उपलब्ध कराने की मांग रखी गयी.

अधिवक्ताओं का कहना था कि संबंधित अभिलेख निर्मली में उपलब्ध होने से पक्षकारों और अधिवक्ताओं को सुविधा होगी. उन्हें मुकदमों से जुड़े दस्तावेजों के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

इस पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने आश्वासन दिया कि निर्मली अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय से संबद्ध ऐसे दीवानी वादों के अभिलेख, जो फिलहाल सुपौल और वीरपुर में हैं, उन्हें जल्द निर्मली में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जायेगी.

फौजदारी मामलों की सुनवाई पर भी चर्चा

अधिवक्ताओं ने निर्मली में फौजदारी वादों की सुनवाई वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू कराने की मांग भी रखी.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि निर्मली में फौजदारी वादों की सुनवाई शुरू कराने के लिए उच्च न्यायालय स्तर से कार्रवाई चल रही है. इससे संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद व्यवस्था शुरू होने की उम्मीद है.

फौजदारी मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर होने से पक्षकारों को सुपौल या अन्य स्थानों तक जाने की परेशानी कम हो सकती है.

वकालतखाना के लिए जमीन और भवन की मांग

स्थानीय अधिवक्ताओं ने वकालतखाना के लिए जमीन और भवन उपलब्ध कराने की समस्या भी सामने रखी. अधिवक्ताओं का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था उनके लिए सुविधाजनक नहीं है और पर्याप्त जगह की जरूरत है.

इस पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं को संबंधित स्तर पर पत्राचार करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि राज्य के प्रतिनिधियों और सरकार के अधिकारियों से भी मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए पहल की जानी चाहिए.

उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके स्तर से भी समस्या के निदान के लिए सकारात्मक और विधिसम्मत सहयोग किया जायेगा.

मिथिला के पाग और शॉल से हुआ सम्मान

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह के निर्मली पहुंचने पर स्थानीय न्यायाधीशों, न्यायालय कर्मियों और अधिवक्ताओं ने उनका सम्मान किया.

विधिज्ञ संघ के पूर्व अध्यक्ष सह अधिवक्ता रामलखन प्रसाद यादव ने उन्हें मिथिला का पाग, शॉल और माला पहनाकर सम्मानित किया. अन्य अधिवक्ताओं ने भी फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया.

स्वागत कार्यक्रम में वर्तमान अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे. कई अधिवक्ताओं ने अपने विचार भी रखे और न्यायालय से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा.

अधिवक्ताओं के साथ कोर्ट भवन का किया निरीक्षण

स्वागत और विचार-विमर्श कार्यक्रम के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के साथ व्यवहार न्यायालय भवन एवं उसके प्रांगण का निरीक्षण किया.

निरीक्षण के दौरान उन्होंने न्यायालय भवन की सुविधाओं और व्यवस्था को देखा. निरीक्षण के बाद उन्होंने भवन की सुविधाओं की सराहना की.

उन्होंने कहा कि इस तरह की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस न्यायालय भवन फिलहाल बिहार राज्य में कहीं भी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि निर्मली में वकालतखाना भी इसी स्तर का बनाया जायेगा.

Nirmali Court News: न्यायिक सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों को उम्मीद

निर्मली अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय से जुड़े मुद्दों पर हुई यह बैठक स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले पक्षकारों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

दीवानी मामलों के अभिलेख निर्मली में उपलब्ध होने, फौजदारी मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने और अधिवक्ताओं के लिए बेहतर वकालतखाना उपलब्ध होने से न्यायिक कामकाज अधिक सुविधाजनक हो सकता है.

अब स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं की नजर इस बात पर है कि बैठक में दिये गये आश्वासन कब तक जमीन पर उतरते हैं.

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लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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