कोसी का कहर: 100 से अधिक घर नदी में समाए, फसल भी तबाह

प्रभावित परिवारों को दी गयी सहायता : एसडीएम

सुपौल. कोसी नदी के जल स्तर में कमी होने के साथ ही नदी की धारा काफी तेज हो गया है. नदी सदर प्रखंड के बलवा पंचायत के लालगंज में उग्र रूप धारण कर ली है. जल संसाधन विभाग के कटाव निरोधी कार्य नदी के समक्ष बौना साबित हो रहा है. बीते दिनों लालगंज में करीब तीन दर्जन परिवार के घरों को नदी अपने आगोश में समा ली थी. अचानक नदी के रौद्र रूप धारण कर लेने से गांव के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया था. जिन लोगों के घर को नदी लील ली. वह लोग ऊंचे स्थान की ओर पलायन करने लगे. वहीं जहां नदी का दबाव था. वहां से लोग अपने घर को तोड़ कर तटबंध पर बसेरा बना लिया है. अब एक फिर से नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. फिर से गांव में कटाव शुरू हो गया है. जिससे लोगों में डर का माहौल है. लोग प्रशासन से कटाव निरोधी कार्य में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं. कटाव बंद होने के बाद प्रशासन द्वारा सामुदायिक किचन भी बंद कर दिया गया था. अब फिर से कटाव शुरू होने पर पीड़ित परिवारों ने सामुदायिक किचन प्रारंभ करने की मांग किया है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कटाव ने न सिर्फ उनके घर उजाड़ दिए हैं, बल्कि उपजाऊ खेत भी नदी की धारा में समा गए. धान और मक्का की बुआई कर चुके किसानों की पूरी मेहनत बर्बाद हो गई है. कई परिवारों की जीविका पूरी तरह समाप्त हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल राहत और मुआवजा मिलने के बावजूद उनकी स्थायी समस्या जस की तस बनी रहती है. उन्हें अब केवल अस्थायी मदद नहीं, बल्कि पक्का घर, सुरक्षित रोज़गार और मजबूत तटबंध चाहिए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले वर्षों में कोसी क्षेत्र के हजारों-लाखों लोग फिर से उजड़ने को मजबूर होंगे. 100 परिवार के घर पर मंडरा रहा खतरा नदी की धारा तेज होने के बाद लालगंज में 100 परिवारों के घर पर खतरा मंडरा रहा है. मंगलवार को नदी तेज धारा तेजी से मिट्टी का कटाव शुरू कर दिया है. हालांकि कटाव रोकने व नदी की धारा को कम करने के लिए मिट्टी भरा बोरा किनारे में लगाया गया है. बावजूद नदी का कटाव शुरू है. कटाव की सूचना पर बलवा पंचायत के पूर्व मुखिया रविशंकर रवि, जदयू जिला महासचिव खुर्शीद आलम, ओमप्रकाश यादव, जिला प्रवक्ता प्रमोद कुमार मंडल कटाव स्थल का जायजा लिया. जिन्होंने प्रशासन को स्थल से ही नदी के नेचर व स्थानीय लोगों की पीड़ा को बताया. इसके बाद जल संसाधन की टीम मौके पर पहुंच गयी है. जो नदी की धारा को मोड़ने की दिशा में जुट गये हैं, लेकिन स्थिति यह है कि कटाव स्थल से 50 मीटर दूर एक चाप में नदी की धारा प्रवेश करती है तो वहां बसे 100 परिवार का घर देखते ही देखते नदी में समा सकता है. पुरानी पीड़ा को कर गया ताजा कोसी का यह कटाव एक बार फिर उसी पुरानी पीड़ा को ताजा कर गया है, जब हर साल हजारों लोग अपने आशियाने और सपनों को नदी की धार में बहते देखने को मजबूर हो जाते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि पिछले साल भी कटाव से दर्जनों द्वारा नदी में विलीन हो गये. अगर इसका स्थायी निदान नहीं किया गया तो दोनों तटबंधों के बीच बसे हजारों की आबादी एक दिन पूरी तरह कोसी में समा जायेगी. प्रभावित परिवारों को दी गयी सहायता : एसडीएम सदर एसडीओ इंद्रवीर कुमार ने जानकारी दी कि सुपौल एवं किशनपुर अंचल में कटाव से अब तक 100 से अधिक घर नदी में बह गए हैं. उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मुआवजे के लिए चिन्हित कर लिया गया है. प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई है. सरकारी राहत योजना के तहत आर्थिक मदद भी दी जाएगी.

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