सुपौल में 150 साल पुरानी दुर्गा सप्तशती पांडुलिपि मिली

इस खोज और संरक्षण अभियान में योगदान देने वाले श्री रविशेखर सिंह एवं श्री जवाहर मिश्रा के प्रति स्थानीय लोगों ने आभार व्यक्त किया है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं.

सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट:

सुपौल: जिले के कोरियापट्टी गांव से एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर प्रकाश में आई है. यहां लगभग 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती की पांडुलिपि की खोज की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और गौरव का माहौल है.

हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती की पांडुलिपि

यह दुर्लभ पांडुलिपि श्री रविशेखर सिंह के सहयोग और श्री जवाहर मिश्रा के संरक्षण में वर्षों से सुरक्षित रखी गई थी, जिसे अब सार्वजनिक रूप से जिले की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सामने लाया गया है.

कोरियापट्टी गांव में दुर्गा पूजा महोत्सव की एक विशिष्ट परंपरा है, जहां पीढ़ियों से हस्तलिखित दुर्गा सप्तशती के पाठ की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जा रही है. यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण मानी जाती है.

इस खोज और संरक्षण अभियान में योगदान देने वाले श्री रविशेखर सिंह एवं श्री जवाहर मिश्रा के प्रति स्थानीय लोगों ने आभार व्यक्त किया है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं.

इधर जिला कला एवं संस्कृति विभाग ने इस खोज को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, मंदिरों, मठों और पुराने संग्रहों में सुरक्षित पड़ी प्राचीन पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी साझा करें, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके. विभाग ने कहा है कि ऐसे प्रयास सुपौल की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान दिलाने में भी सहायक साबित हो सकते हैं.

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Published by: Shruti Kumari

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