खेतीबाड़ी : यूरिया के विकल्प के रूप में अमोनियम सल्फेट अपनाने की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों के लिए संतुलित पोषण पर दिया जोर

By RAJEEV KUMAR JHA | January 2, 2026 6:16 PM

– कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों के लिए संतुलित पोषण पर दिया जोर राघोपुर. रबी फसलों की बुआई अब अंतिम चरण में है. पिछले महीने बोये गये गेहूं और मक्का की फसलों में इस समय पहली-दूसरी पटवन चल रही है. फसल वृद्धि के इस महत्वपूर्ण चरण में नाइट्रोजन की आवश्यकता अधिक होती है. जिसके लिए किसान आमतौर पर यूरिया खाद का उपयोग करते हैं. यूरिया लंबे समय से नाइट्रोजन का सबसे सस्ता और प्रचलित स्रोत रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में इसके अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से फसलों, मिट्टी और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है. इस संदर्भ में प्रखंड क्षेत्र स्थित भारत सरकार के कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह-प्रधान डॉ नित्यानंद ने किसानों को यूरिया के स्थान पर अमोनियम सल्फेट उर्वरक के प्रयोग की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि फसलों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन की पूर्ति यूरिया और अमोनियम सल्फेट दोनों से की जा सकती है. लेकिन अमोनियम सल्फेट कई मामलों में बेहतर विकल्प साबित होता है. डॉ नित्यानंद के अनुसार अमोनियम सल्फेट में लगभग 20.6 प्रतिशत नाइट्रोजन के साथ-साथ 23 प्रतिशत सल्फर भी होता है, जो प्रोटीन और क्लोरोफिल निर्माण के लिए आवश्यक है. यह उर्वरक नाइट्रोजन को धीरे-धीरे उपलब्ध कराता है. जिससे नाइट्रोजन की हानि कम होती है. फसल को लंबे समय तक पोषण मिलता है. क्षारीय (अल्कलाइन) मिट्टी, सल्फर की कमी वाली भूमि तथा तिलहन, फलदार और सब्जी फसलों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी है. जबकि यूरिया का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकता है. इन दिनों जिले में यूरिया खरीदने की होड़ मची हुई है. किसानों का शिकायत है कि उर्वरक विक्रेता यूरिया के साथ-साथ कैल्शियम नाइट्रेट, सल्फर, जिंक और माइकोराइजा (जैव उर्वरक) खरीदने का दबाव बनाते हैं. जबकि किसानों को इनके उपयोग और आवश्यकता की पूरी जानकारी नहीं दी जाती. इस पर कृषि विज्ञान केंद्र के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ निलेश कुमार ने स्पष्ट किया कि ये सभी पोषक तत्व रबी फसलों, विशेषकर गेहूं और मक्का के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में किसानों में असंतोष पैदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि सही मात्रा और सही समय पर इनका उपयोग करने से उपज और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है. प्रमुख पोषक तत्वों का महत्व कैल्शियम नाइट्रेट पौधों को कैल्शियम और नाइट्रोजन प्रदान करता है. कोशिका भित्ति को मजबूत करता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. गेहूं में 10 किलोग्राम प्रति एकड़, मक्का में 20 किलोग्राम प्रति एकड़, वहीं सरसों, दलहन, मक्का और गेहूं के लिए सल्फर आवश्यक है. यह प्रोटीन और क्लोरोफिल निर्माण में सहायक है. जिसका 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में उपयोग किया जा सकता है. इससे गेहूं की रोटी की गुणवत्ता और सरसों में तेल की मात्रा बढ़ती है. जड़ों और तनों की वृद्धि, हार्मोन व एंजाइम निर्माण तथा नाइट्रोजन-फास्फोरस के उपयोग में जिंक सहायक होता है. इसका उपयोग 10–15 किलोग्राम प्रति एकड़ किया जा सकता है. माइकोराइजा (जैव उर्वरक) फास्फोरस व अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है. जल संरक्षण बढ़ाता है. मिट्टी की संरचना सुधारता है. पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इसका उपयोग 4 किलोग्राम प्रति एकड़ किया जा सकता है. कहते हैं विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ निलेश कुमार ने किसान भाइयों से अपील की है कि वे रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों और जैव उर्वरकों की भूमिका को समझें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित उपयोग करें. इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य, फसल की गुणवत्ता और उपज भी बेहतर होगी.

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